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ज्ञानवापी परिसर की दीवारों पर मंदिर के निशान : पटेल

Thu, 27 Feb 2020 10:57 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 27 Feb 2020 10:57 PM IST
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Tourism minister prahalad patel on gyanvapi campus kashi vishwanath in varanasi
केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल। - फोटो : अमर उजाला।

वाराणसी। केंद्रीय राज्यमंत्री पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद पटेल ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि ज्ञानवापी परिसर की दीवारों पर मंदिर होने के निशान हैं। काशी विश्वनाथ धाम के लिए चल रहे निर्माण के दौरान जब आसपास की दीवारें हटी तो अब सब कुछ साफ नजर आ रहा है। यहां कभी मंदिर की दीवार रही होगी। आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) की जांच रिपोर्ट में सच सामने आ जाएगा। अभी मामला कोर्ट में है, लिहाजा इस पर कोई टिप्पणी ठीक नहीं है।

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प्रहलाद पटेल नदेसर स्थित होटल में न्यूज नेशन की तरफ से आयोजित कॉन्क्लेव ‘काशी कल आज और कल’ में बतौर अतिथि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि एएसआई जब ‘टेंपल सर्वे’ करेगा, तब सही तथ्य देश के सामने आ जाएंगे। काशी विश्वनाथ धाम के लिए मकानों को तोड़े जाने के बाद परिसर की दीवारों पर बने मंदिर के निशान साफ नजर आ रहे हैं। एएसआई की जांच रिपोर्ट पर कोई उंगली नहीं उठा सकता। हां, उनके काम की गति धीमी हो सकती है, लेकिन जांच रिपोर्ट गलत नहीं होगी। अयोध्या के मामले में पूरे देश ने देखा है कि एएसआई की रिपोर्ट बहुत मददगार साबित हुई। कोर्ट ने इसको भी बतौर सबूत माना था।   
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पर्यटन राज्यमंत्री ने कहा कि 2021 तक काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण पूरा हो जाएगा। पर्यटन को लेकर सरकार बहुत गंभीर है। भारत विश्व के नक्शे पर पर्यटन का हब और पर्यटकों के लिए सबसे सुरक्षित देश बनकर उभरा है। इस अवसर पर न्यूज नेशन के एडिटर इन चीफ संजय कुलश्रेष्ठ, कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया ने स्मृति चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया।

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एएसआई की जांच रिपोर्ट पर कोई उंगली नहीं उठा सकता है। हां उनके काम की गति धीमी हो सकती है लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट गलत नहीं होगी। अयोध्या के मामले में पूरे देश ने देखा है कि एएसआई की रिपोर्ट बहुत मददगार साबित हुई। कोर्ट ने इसको भी बतौर सबूत माना था।

उन्होंने कहा कि 2021 तक काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण पूर्ण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यटन को लेकर सरकार बहुत गंभीर है। भारत विश्व के नक्शे पर पर्यटन का हब और पर्यटकों के लिए सबसे सुरक्षित देश बनकर उभरा है।

ज्ञानवापी परिसर विवाद में सिविल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के बीच विवाद के मामले में बुधवार को सिविल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। गत चार फरवरी को अधीनस्थ न्यायालय वाराणसी ने कहा था कि इस मामले में हाईकोर्ट में लंबित याचिका पर पारित स्थगन आदेश छह माह से अधिक पुराना है, इसे बढ़ाया नहीं गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, इस स्थिति में माना जाएगा कि स्थगन आदेश समाप्त हो चुका है। इसलिए केस की सुनवाई दुबारा शुरू हो सकती है।

इस मामले में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अजय भनोट ने अधीनस्थ न्यायालय को मामले की सुनवाई नहीं करने का आदेश दिया है। याची पक्ष के अधिवक्ता का कहना था कि अधीनस्थ अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को समझने में गलती की है। हाईकोर्ट ने अधीनस्थ न्यायालय को लंबित मुकदमे की सुनवाई नहीं करने का आदेश दिया है।

याची का कहना था कि सिविल कोर्ट वाराणसी में चल रहे सिविल विवाद में उसने एक अर्जी दाखिल कर आरंभिक आपत्ति दाखिल की थी। जिसमें कहा गया कि मंदिर-मस्जिद का विवाद सिविल कोर्ट द्वारा तय नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह कानून द्वारा बाधित है। सिविल कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी थी। जिसे 1998 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई है, जिस पर स्थगन आदेश पारित है।

सिविल कोर्ट वाराणसी में चल रहे मूल विवाद में दूसरे पक्षकार मंदिर ट्रस्ट की ओर से स्वयंभू विश्वनाथ मूर्ति हैं। उनका कहना था कि मंदिर का निर्माण करीब 2050 वर्ष पूर्व महाराजा विक्रमादित्य ने करवाया था। मुगल शासक औरंगजेब ने 1664 में मंदिर ध्वस्त कराकर इसके अवशेषों से जमीन के एक हिस्से पर मस्जिद बनवा दी थी।

ट्रस्ट ने सिविल कोर्ट से मांग की है कि मंदिर की जमीन से मस्जिद हटाकर जमीन का कब्जा मंदिर ट्रस्ट को दिया जाए। यह भी कहा गया कि इस मामले में पूजा स्थल ( विशेष प्रावधान) अधिनियम लागू नहीं होगा, क्योंकि मस्जिद का निर्माण मंदिर के एक हिस्से को ध्वस्त करके किया गया है। मंदिर के अधिकांश हिस्से आज भी मौजूद हैं। हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।

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