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आज ही के दिन महामना की बगिया में अंतिम बार आए थे बापू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 21 Jan 2018 04:49 PM IST
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21 जनवरी 1942 को इसी स्थान पर बापू ने की सांध्य प्रार्थना
- फोटो : अमर उजाला
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महामना की बगिया (बीएचयू) के लिए 21 जनवरी का दिन बेहद ही खास है। 75 साल पहले इसी दिन (21 जनवरी 1942) को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का इस कैंपस में अंतिम बार आगमन हुआ था। यहीं नहीं तब विश्वविद्यालय के रजत जयंती समारोह में उन्होंने अपना संबोधन देने के साथ ही यहां सांध्य प्रार्थना भी की थी।
अब इग्नू परिसर में स्थापित बापू की उसी स्मृति को संजोया जा रहा है। अधिक से अधिक लोग इस बारे में जान सकें, इसको लेकर रविवार को यहां प्रार्थना सभा सहित कई आयोजन कराए जा रहे हैं।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर कई मायने में दूसरे संस्थानों से अलग है। स्थापना के 100 साल पूरे करने वाले इस परिसर में न केवल शिक्षा, खेल सहित अन्य गतिविधियां संचालित हो रही हैं बल्कि यूपी समेत कई राज्यों के मरीजों का हर दिन अस्पताल और ट्रामा सेंटर में इलाज भी हो रहा है।
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21 जनवरी 1942 में मनाए जाने वाला रजत जयंती समारोह इसलिए भी खास था कि इसमें महात्मा गांधी के साथ ही पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, पंडित गोविंद बल्लभ पंत, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सरदार बल्लभ भाई पटेल आदि इसके साक्षी रहे।
जिस स्थान पर बापू ने सांध्य प्रार्थना की थी, उसी जगह पर रविवार को कई आयोजन किए जा रहे हैं। इग्नू अध्ययन केंद्र क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एएन त्रिपाठी के निर्देशन में यहां दिन में भजन, परिचर्चा के साथ ही सांध्य प्रार्थना भी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि 1942 में बापू की काशी की धरती पर 10वीं और आखिरी यात्रा थी और इस दिन उन्होंने सांध्य प्रार्थना भी की थी।
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अब इग्नू परिसर में स्थापित बापू की उसी स्मृति को संजोया जा रहा है। अधिक से अधिक लोग इस बारे में जान सकें, इसको लेकर रविवार को यहां प्रार्थना सभा सहित कई आयोजन कराए जा रहे हैं।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर कई मायने में दूसरे संस्थानों से अलग है। स्थापना के 100 साल पूरे करने वाले इस परिसर में न केवल शिक्षा, खेल सहित अन्य गतिविधियां संचालित हो रही हैं बल्कि यूपी समेत कई राज्यों के मरीजों का हर दिन अस्पताल और ट्रामा सेंटर में इलाज भी हो रहा है।
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21 जनवरी 1942 में मनाए जाने वाला रजत जयंती समारोह इसलिए भी खास था कि इसमें महात्मा गांधी के साथ ही पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, पंडित गोविंद बल्लभ पंत, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सरदार बल्लभ भाई पटेल आदि इसके साक्षी रहे।
जिस स्थान पर बापू ने सांध्य प्रार्थना की थी, उसी जगह पर रविवार को कई आयोजन किए जा रहे हैं। इग्नू अध्ययन केंद्र क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एएन त्रिपाठी के निर्देशन में यहां दिन में भजन, परिचर्चा के साथ ही सांध्य प्रार्थना भी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि 1942 में बापू की काशी की धरती पर 10वीं और आखिरी यात्रा थी और इस दिन उन्होंने सांध्य प्रार्थना भी की थी।