Tirupati Prasad: तिरुपति बालाजी के प्रसाद में चर्बी मिलना आस्था पर चोट, मिले सख्त सजा
तिरुपति बालाजी में प्रसाद में जानवरों की चर्बी मिलने के मुद्दे को लेकर काशी में सनातनधर्मियों में नाराजगी है। उनकी मांग है कि आंध्र के सीएम सहित सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्री मंदिरों में गैर हिंदूओं के प्रवेश पर रोक लगाएं।
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तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में चर्बी मिलने की रिपोर्ट के बाद सनातनधर्मियों में आक्रोश है। काशी के संत, विद्वत समाज और सामाजिक संगठनों ने इसकी निंदा करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की योजना बनाई है, जो मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पवित्रता बनाए रखने के दिशा-निर्देश तैयार करेगी।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि जल्द ही विश्वविद्यालय की ओर से समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति सभी धार्मिक स्थलों पर पवित्रता बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि तिरुपति बालाजी मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। वहां प्रसाद के घी में चर्बी का मिलना अत्यन्त दुःखद और घृणित कृत्य है।
उन्होंने सरकार और मंदिर प्रशासन से इस घटना की जांच करने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने मंदिर प्रशासन से अपील की है कि वे प्रसाद की गुणवत्ता की जांच के लिए नियमित परीक्षण करें। सभी धार्मिक अनुयायियों को धैर्य व संयम बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि मंदिर प्रशासन और सरकार इस मामले में शीघ्र ही उचित कार्यवाही करेगी। संस्कृत विभाग के प्रमुख प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने कहा कि हिंदू धार्मिक स्थलों की पवित्रता की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। तिरुपति मंदिर जैसे प्रतिष्ठित स्थल पर इस प्रकार की घटना शर्मनाक है।
बालाजी तिरुपति से जुड़ी है 30 करोड़ हिंदू भक्तों की आस्था
मठ-मंदिर चलाना सरकारों का काम नहीं
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि यह गंभीर किस्म का धार्मिक अपराध है। मंदिर के प्रसाद में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल निंदनीय है। मठ मंदिर चलाना सरकारों का काम नहीं है। हमारे मंदिर हमारी श्रद्धा के केंद्र हैं, वह समाज के द्वारा ही संचालित होने चाहिए। मंदिरों में गैर हिंदुओं का प्रवेश और उनके द्वारा मंदिरों का संचालन कतई नहीं होना चाहिए।
आस्था से खिलवाड़ करने वालों पर हो कठोर कार्रवाई
सतुआ बाबा आश्रम के महामंडलेश्वर संतोष दास ने कहा कि सनातन के नाश के लिए जो कूटनीतियां रची जा रही हैं इस पर हमें चेतना होगा। किसी को प्रसाद में अभक्ष्य खिलाना न्याय के विरुद्ध है। मैं उच्चतम न्यायालय से निवेदन करना चाहता हूं कि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई करें और उनको जेल भेजें। मंदिर की व्यवस्था को सनातन को जानने और मानने वालों को सौंपा जाए।
भगवान तिरुपति के प्रसाद में मिलावट हिंदू समाज के प्रति अपराध
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि तिरुमाला लड्डू घटिया सामग्री से बनाए गए थे। यह हिंदुओं का धर्मभ्रष्ट करने की बड़ी चाल लगती है। हमारे संविधान और कानून के अनुसार दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। हम सनातनी हिंदुओं की ओर से सरकार और न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि वे इसे अभियोग के रूप में पंजीकृत कर फास्ट ट्रैक सुनवाई करते हुए दोषियों को शीघ्र दंडित करें। शंकराचार्य पीठ मांग करती है कि हिंदू समाज को बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप या नियंत्रण के अपने सभी मंदिरों की सुरक्षा, प्रशासन और संचालन की शक्ति वापस दी जाए। चारों शंकराचार्य परस्पर परामर्श कर धर्मरक्षा के लिए व्यापक अभियान की रूपरेखा तैयार करेंगे। शृंगेरी और द्वारका शंकराचार्यों के साथ अपने विधि विशेषज्ञों से परामर्श ले रहे हैं। इसके बाद न्यायालय का रुख करेंगे।