बसंत पंचमी पर होगा बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव, महंत आवास ढहने से हो गया था सिंहासन क्षतिग्रस्त
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काशी विश्वनाथ मंदिर में पंचबदन रजत प्रतिमा का तिलकोत्सव बसंत पंचमी के दिन ही होगा। माघमास शुक्लपक्ष पंचमी (30 जनवरी) को परंपरानुसार होने वाले इस तिलकोत्सव की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
356 वर्षों से चली आ रही लोकपरंपरा के अनुसार महंत डॉ. कुलपति तिवारी ही प्रतिमा पर तिलक लगाकर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा के परिणयोत्सव परंपरा का आरंभ करेंगे।
बाबा का चढ़ने वाला तिलकोत्सव टेढ़ीनीम स्थित जिस भवन में महंत परिवार ठहरा है, वहीं से होगा। काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन सुबह बाबा के रजत प्रतिमा का विधि विधान से वैदिक मंत्रों द्वारा षोडशोपचार और रुद्राभिषेक पूजन कराया जाएगा।
इसके बाद शाम को काशी पुराधिपति के तिलकोत्सव की रस्म विधि विधान से अदा की जाएगी। शाम 6 बजे बाबा की प्रतिमा का तिलक कार्यक्रम और शाम 7 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां होगी।
उन्होंने बताया कि भवन ढहने से उसके मलबे में दबकर बाबा का सिंहासन क्षतिग्रस्त हो गया था। ऐसे में इस साल बाबा का तिलकोत्सव लकड़ी की चौकी पर कुश व गंगा मिट्टी से बने सिंहासन पर होगा। इसी पर बाबा की रजत प्रतिमा को रखकर तिलकोत्सव की रस्म अदा की जाएगी।