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Varanasi News: व्यक्तित्व विकास के साथ नेतृत्व और टीमवर्क सिखाता है रंगमंच
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वाराणसी। भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान, कला और रचनात्मकता को नवाचार से जोड़ने के उद्देश्य से बीएचयू के भारतीय अध्ययन केंद्र में तीन दिवसीय ‘इंडियन कल्चरल इनोवेशन्स कॉन्क्लेव-2026’ का सोमवार को शुभारंभ हुआ। रंगमंच और सिनेमा कलाकार संजय मिश्रा ने बनारसी अंदाज में उपस्थित जनसमूह और विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन को पूरे उत्साह के साथ जीने और अपने कार्य को पूरी लगन एवं मन से करने के लिए प्रेरित किया।
बतौर मुख्य वक्ता सिनेमा और रंगमंच के कलाकार पद्मश्री अनिल कुमार रस्तोगी ने कहा कि रंगमंच व्यक्तित्व विकास के साथ नेतृत्व और टीमवर्क सिखाता है। अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के तहत संचालित एआईटीएम फाउंडेशन फॉर इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप की ओर से आयोजित कॉन्क्लेव में अनिल रस्तोगी ने ‘सिनेमा एवं रंगमंच कलाकार : रंगमंच में नवाचार’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रंगमंच व्यक्ति के व्यक्तित्व का गुणात्मक विकास करता है। रंगमंच कलाकार को बेहतर और आत्मविश्वासी बनाता है, क्योंकि यहां रिटेक का अवसर नहीं होता। मंच पर प्रस्तुति के दौरान कलाकार को परिस्थितियों के अनुरूप तत्काल निर्णय लेने और अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाने की सीख मिलती है।
विशिष्ट अतिथि लेखिका डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि भाषा का युद्ध वही जीतेगा, जो अपनी भाषा बोलेगा। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा आज भी देश में अंग्रेजी के अहंकार से संघर्ष कर रही है। अतिथियों का स्वागत अशोका इंस्टीट्यूट के चेयरमैन इं. अंकित मौर्य, डायरेक्टर डॉ. सारिका श्रीवास्तव और बीएचयू भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शारदेंदु ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रशांत, अनन्या और ज्योति ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अपर्णा सिंह ने किया।
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बतौर मुख्य वक्ता सिनेमा और रंगमंच के कलाकार पद्मश्री अनिल कुमार रस्तोगी ने कहा कि रंगमंच व्यक्तित्व विकास के साथ नेतृत्व और टीमवर्क सिखाता है। अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के तहत संचालित एआईटीएम फाउंडेशन फॉर इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप की ओर से आयोजित कॉन्क्लेव में अनिल रस्तोगी ने ‘सिनेमा एवं रंगमंच कलाकार : रंगमंच में नवाचार’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रंगमंच व्यक्ति के व्यक्तित्व का गुणात्मक विकास करता है। रंगमंच कलाकार को बेहतर और आत्मविश्वासी बनाता है, क्योंकि यहां रिटेक का अवसर नहीं होता। मंच पर प्रस्तुति के दौरान कलाकार को परिस्थितियों के अनुरूप तत्काल निर्णय लेने और अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाने की सीख मिलती है।
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विशिष्ट अतिथि लेखिका डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि भाषा का युद्ध वही जीतेगा, जो अपनी भाषा बोलेगा। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा आज भी देश में अंग्रेजी के अहंकार से संघर्ष कर रही है। अतिथियों का स्वागत अशोका इंस्टीट्यूट के चेयरमैन इं. अंकित मौर्य, डायरेक्टर डॉ. सारिका श्रीवास्तव और बीएचयू भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शारदेंदु ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रशांत, अनन्या और ज्योति ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अपर्णा सिंह ने किया।
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