{"_id":"5827829f4f1c1bf47eb3c3d6","slug":"the-people-behind-the-salt-and-owl","type":"story","status":"publish","title_hn":"नमक और नोट के पीछे उल्लू बनी जनता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नमक और नोट के पीछे उल्लू बनी जनता
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
Updated Sun, 13 Nov 2016 02:29 AM IST
विज्ञापन
उलूक महोत्सव में लालटेन से उतारी उल्ली की आरती।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चाहे खाट पंचायत रही हो या फिर नमक और नोट के पीछे आधी रात से भागता आम आदमी। उलूक महोत्सव के जरिए ऐसी हर बड़ी घटना पर दिलचस्प तरीके से चोट की गई। बाजार में तैरती अफवाहों के बीच परेशान हर आमोखास के एक झटके में उल्लू बनने की प्रक्रिया को हास्य-विनोद के माध्यम से बखूबी पेश किया गया। नमक की किल्लत की अफवाहों के बीच जहां आम जन को उल्लू बनाया गया, वहीं एक हजार, पांच सौ के नोट पर अचानक प्रतिबंध से नेता, अफसर, इंजीनियर, डॉक्टर, व्यापारी, बिल्डर से लेकर जमाखोर तक उल्लूपन के शिकार हुए। डपोरशंख की अध्यक्षता में इस बार के उलूक महोत्सव को बड़बोलापन और ब्लैक मनी पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक से जोड़ा गया। उल्टेपुल्टे कामों पर हंसी-ठहाकों से चोट करने के लिए इस महोत्सव की शुरुआत 16 वर्ष पहले नागरी प्रचारिणी सभा में शनिवार गोष्ठी की ओर से की गई थी।
नमक और नोट के पीछे आम जन से लेकर खास तक कैसे उल्लू बने, इसे शनिवार की रात उलूक महोत्सव में कनस्टर पीटकर, मोमबत्ती से उलूक की आरती उतारकर बखूबी पेश किया गया। हास्य काव्य पाठ और व्यंगात्मक रचानाओं से मौजूद लोगों को खूब हंसाया और लोटपोट कर दिया। नोएडा से आए कवि अलीहसन मकरैंडिया ने अपनी कविता, ‘मंदिर से मस्जिद से निकलो गिरजे व गुरुद्वारों से, करो देश की आज हिफाजत भीतर के गद्दारों से..’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
शनिवार गोष्ठी की ओर से आयोजित खाट से सजे मंच कार्यक्रम का नाम इस बार ‘बड़बोलापन’ रखा गया था। रायबरेली से आए मधुप श्रीवास्तव ‘नरककाल’ ने ‘मोदीजी गेंद न जाने किस पाले उछाल रहे हैं, काला धन लाने को कहा था पर ये घर कही निकाल रहे हैं..’ सुनाया। श्रोताओं ने खूब सराहा। अलीहसन मकरैंडिया ने सुनाया कि चैन तो बेच दिया है, अमन को बेच देंगे ये, भेड़िये भूखे कुर्सी के, वतन को बेच देंगे ये...। इसी तरह सतना मध्य प्रदेश से आई मधु माधवी ने भंवर में नाव भारत की है.. सुनाया। वहीं सुदामा तिवारी ‘सांड़ बनारसी’ ने सुनाया कि कोई कहता है अब देश का विकास होगा...जहां देखो वहीं बड़बोलापन छाया है...। विजेंद्र मिश्र दमदार, झगड़ू भैया ने भी हास्य रचनाओं को दर्शकों को खूब गुदगुदाया।
विज्ञापन
इससे पहले नमक और नोटों की मारामारी के बीच गाजे-बाजे के साथ उलूक महोत्सव के मंडप से उलूक महाराज की शोभायात्रा मैदागिन से दारानगर होते हुए नागरी प्रचारिणी सभा पहुंची। वहां लालटेन दिखाकर आरती और पूजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ढपोर शंख ने की। संचालन पंडित धर्मशील चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश में बहुत टायलेट बन रहा है। माहौल बहुत खराब हो चुका है।
इसलिए अबकि कवियों को टायलेट के रूप में कमोड और मास्क देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सीमा, उत्पाद शुल्क सदस्य न्यायिक अनिल चौधरी ने किया। इस मौके पर नरकंकाल, बृजेश पांडेय, बेहोश जौनपुरी, ताज आजमी, डंडा बनारसी, रंजना राय आदि उपस्थित थे।इससे पहले गोलघर से सगड़ी पर उलूक महाराज की शोभायात्रा निकाली गई। कनस्टर पीटकर मोमबत्ती से आरती हुई। मूली-बैगन, हरी मिर्च की मालाओं से अतिथियों का स्वागत किया गया।
विज्ञापन
नमक और नोट के पीछे आम जन से लेकर खास तक कैसे उल्लू बने, इसे शनिवार की रात उलूक महोत्सव में कनस्टर पीटकर, मोमबत्ती से उलूक की आरती उतारकर बखूबी पेश किया गया। हास्य काव्य पाठ और व्यंगात्मक रचानाओं से मौजूद लोगों को खूब हंसाया और लोटपोट कर दिया। नोएडा से आए कवि अलीहसन मकरैंडिया ने अपनी कविता, ‘मंदिर से मस्जिद से निकलो गिरजे व गुरुद्वारों से, करो देश की आज हिफाजत भीतर के गद्दारों से..’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
विज्ञापन
शनिवार गोष्ठी की ओर से आयोजित खाट से सजे मंच कार्यक्रम का नाम इस बार ‘बड़बोलापन’ रखा गया था। रायबरेली से आए मधुप श्रीवास्तव ‘नरककाल’ ने ‘मोदीजी गेंद न जाने किस पाले उछाल रहे हैं, काला धन लाने को कहा था पर ये घर कही निकाल रहे हैं..’ सुनाया। श्रोताओं ने खूब सराहा। अलीहसन मकरैंडिया ने सुनाया कि चैन तो बेच दिया है, अमन को बेच देंगे ये, भेड़िये भूखे कुर्सी के, वतन को बेच देंगे ये...। इसी तरह सतना मध्य प्रदेश से आई मधु माधवी ने भंवर में नाव भारत की है.. सुनाया। वहीं सुदामा तिवारी ‘सांड़ बनारसी’ ने सुनाया कि कोई कहता है अब देश का विकास होगा...जहां देखो वहीं बड़बोलापन छाया है...। विजेंद्र मिश्र दमदार, झगड़ू भैया ने भी हास्य रचनाओं को दर्शकों को खूब गुदगुदाया।
विज्ञापन
इससे पहले नमक और नोटों की मारामारी के बीच गाजे-बाजे के साथ उलूक महोत्सव के मंडप से उलूक महाराज की शोभायात्रा मैदागिन से दारानगर होते हुए नागरी प्रचारिणी सभा पहुंची। वहां लालटेन दिखाकर आरती और पूजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ढपोर शंख ने की। संचालन पंडित धर्मशील चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश में बहुत टायलेट बन रहा है। माहौल बहुत खराब हो चुका है।
इसलिए अबकि कवियों को टायलेट के रूप में कमोड और मास्क देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सीमा, उत्पाद शुल्क सदस्य न्यायिक अनिल चौधरी ने किया। इस मौके पर नरकंकाल, बृजेश पांडेय, बेहोश जौनपुरी, ताज आजमी, डंडा बनारसी, रंजना राय आदि उपस्थित थे।इससे पहले गोलघर से सगड़ी पर उलूक महाराज की शोभायात्रा निकाली गई। कनस्टर पीटकर मोमबत्ती से आरती हुई। मूली-बैगन, हरी मिर्च की मालाओं से अतिथियों का स्वागत किया गया।