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विकारों की आहुति से मन होगा निर्मल
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 24 Jul 2016 02:10 AM IST
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बाल व्यास
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धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के धर्मसंघ परिसर में प्रख्यात भागवत मर्मज्ञ बाल व्यास ने नौ दिवसीय कथा के पहले दिन शनिवार को ज्ञान, भक्ति, वैराग्य पर रोशनी डाली। दीप प्रज्ज्वलन के बाद कहा कि भागवत कथा ही ज्ञान यज्ञ है। कान रूपी हवन कुंड से बुद्धि रूपी अग्नि में प्रवचन सामग्री से मन के विकारों का हवन करने से मन शुद्ध हो जाता है।
कहा कि कुछ न करने से अच्छा होता है पढ़ना। पढ़ने से अच्छा होता है जपना और जपने से भी अच्छा होता है ध्यान करना। इससे मनुष्य का आत्मबल बढ़ता है। बाल व्यास ने कहा कि पशु अपने गले में बंधी रस्सी को नहीं काट सकता, किंतु मनुष्य ज्ञान से मुक्ति पा सकता है। जीवन में सत्संग का बड़ा महत्व है। इससे कुमार्गी भी सन्मार्ग पर चलने में सफल हो सकता है। कहा कि इस दौर में काम, क्रोध, कंचन, कामिनी जैसी चकाचौंध में रहकर भी आदमी बुराइयों से बच सकता है। बशर्ते उसके साथ श्रीमद्भागवत हो।
श्रीमद्भागवत, रामायण, गीता जैसे ग्रंथ हमें आनंद के साथ जीवन जीने की कला सिखाते हैं। भागवत के तीन विभाग हैं- भक्ति, ज्ञान और वैराग्य। तीनों मनुष्य के भीतर होते हैं, इसलिए इसे आध्यात्म कहते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौर में बड़ी संख्या में मनुष्य दूसरों को या स्वजनों को भी कष्ट देकर आनंद पाना चाहते हैं, जबकि सबको आनंद देकर ही आनंद प्राप्त किया जा सकता है।
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मनुष्य अपनी सोच से ही दु:खी और सुखी होता है। इससे पहले उद्यमी दीनानाथ झुनझुनवाला, आरके चौधरी, चंपालाल सरावगी, जगजीतन पांडेय, कमलेश बाजोरिया, जयकिशन केडिया, विनय पोद्दार, सुमन सिंधी, अवधेश खेमका सहित अनेक भक्तों ने व्यासपीठ का
पूजन किया।
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कहा कि कुछ न करने से अच्छा होता है पढ़ना। पढ़ने से अच्छा होता है जपना और जपने से भी अच्छा होता है ध्यान करना। इससे मनुष्य का आत्मबल बढ़ता है। बाल व्यास ने कहा कि पशु अपने गले में बंधी रस्सी को नहीं काट सकता, किंतु मनुष्य ज्ञान से मुक्ति पा सकता है। जीवन में सत्संग का बड़ा महत्व है। इससे कुमार्गी भी सन्मार्ग पर चलने में सफल हो सकता है। कहा कि इस दौर में काम, क्रोध, कंचन, कामिनी जैसी चकाचौंध में रहकर भी आदमी बुराइयों से बच सकता है। बशर्ते उसके साथ श्रीमद्भागवत हो।
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श्रीमद्भागवत, रामायण, गीता जैसे ग्रंथ हमें आनंद के साथ जीवन जीने की कला सिखाते हैं। भागवत के तीन विभाग हैं- भक्ति, ज्ञान और वैराग्य। तीनों मनुष्य के भीतर होते हैं, इसलिए इसे आध्यात्म कहते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौर में बड़ी संख्या में मनुष्य दूसरों को या स्वजनों को भी कष्ट देकर आनंद पाना चाहते हैं, जबकि सबको आनंद देकर ही आनंद प्राप्त किया जा सकता है।
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मनुष्य अपनी सोच से ही दु:खी और सुखी होता है। इससे पहले उद्यमी दीनानाथ झुनझुनवाला, आरके चौधरी, चंपालाल सरावगी, जगजीतन पांडेय, कमलेश बाजोरिया, जयकिशन केडिया, विनय पोद्दार, सुमन सिंधी, अवधेश खेमका सहित अनेक भक्तों ने व्यासपीठ का
पूजन किया।