सुरों से सजी शाम, गूंजे राग-ताल
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रात करीब 8:30 बजे संगीत महफिल का आगाज भजन से हुआ। इसके बाद पं. गणेश शंकर मिश्र का स्वतंत्र तबला वादन हुआ। तीन ताल में इन्होंने उठान, बाट, गत, फर्द, कायदा, तिहाई के अलावा छोटी-छोटी गतों को बजाकर वाहवाही बटोरी। इनके बाद राजन तिवारी ने भोजपुरिया मिठास से माहौल को रसमय बना दिया। उन्होंने निर्गुण पेश किया। पक्तियां इस तरह थीं- एक दिन नदी के तीरे जात रहली धीरे-धीरे...। इसके बाद पिया मेहंदी मंगा दा विंध्याचल पहाड़ी से , जाय के ठेला गाड़ी से ना... की प्रस्तुति की
इनके बाद नयन राय की बांसुरी गूंजी। अमलेश शुक्ल अमल ने -बम बम बोल रहा है काशी... को सुरों से सजाकर तालियां बटोरी। स्वाति, नेहा, श्रद्धा पांडेय, रागिनी त्रिपाठी ने भी भजनों, गीतों की प्रस्तुति से मन मोहा। इनके बाद शिल्पी बनर्जी, शिप्रा श्रीवास्तव, ममता मिश्रा का नृत्य यादगार बन गया।