{"_id":"62b72aab43f60450545d5722","slug":"the-brain-disease-tb-increasing-rapidly-inecessary-to-be-careful","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Brain TB: वाराणसी में तेजी से बढ़ रही ब्रेन टीबी की बीमारी, रिम्स के डायरेक्टर बोले- सावधानी बेहद जरूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Brain TB: वाराणसी में तेजी से बढ़ रही ब्रेन टीबी की बीमारी, रिम्स के डायरेक्टर बोले- सावधानी बेहद जरूरी
Sun, 26 Jun 2022 12:50 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sun, 26 Jun 2022 12:50 PM IST
सार
आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से दो दिवसीय सेमिनार में भाग लेने आए रिम्स (रांची इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस) के डायरेक्टर डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने बातचीत में बताया कि ब्रेन टीबी के मरीजों को एक साल तक चिकित्सक की सलाह पर दवा लेते रहना चाहिए।
विज्ञापन
रिम्स के डायरेक्टर डॉ. कामेश्वर प्रसाद
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वाराणसी में सामान्य टीबी के साथ ही अब ब्रेन टीबी की बीमारी भी बढ़ती जा रही है। इसमें मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के बाद टीबी के बैक्टीरिया का दुष्प्रभाव तेजी से दिखने लगता है। इससे ब्रेन टीबी की बीमारी भी बढ़ने लगती है।
आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से दो दिवसीय सेमिनार में भाग लेने आए रिम्स (रांची इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस) के डायरेक्टर डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने बातचीत में बताया कि ब्रेन टीबी के मरीजों को एक साल तक चिकित्सक की सलाह पर दवा लेते रहना चाहिए।
डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने बताया कि सामान्य टीबी में मरीजों को छह महीने तक नियमित दवा चिकित्सक की सलाह पर लेते रहना चाहिए, लेकिन ब्रेन टीबी के मरीजों को जो डब्ल्यूएचओ की ओर से गाइड लाइन 2016 में तैयार कराई गई है, उसके अनुसार एक साल तक नियमित दवा लेनी होगी। यह जानने की बहुत जरूरत है कि टीबी की बीमारी किसी को भी हो सकती है। ऐसा इसलिए कि बचपन से ही सामान्य टीबी के बैक्टीरिया किसी न किसी रूप में प्रभावी होते हैं लेकिन वह नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से दो दिवसीय सेमिनार में भाग लेने आए रिम्स (रांची इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस) के डायरेक्टर डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने बातचीत में बताया कि ब्रेन टीबी के मरीजों को एक साल तक चिकित्सक की सलाह पर दवा लेते रहना चाहिए।
विज्ञापन
डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने बताया कि सामान्य टीबी में मरीजों को छह महीने तक नियमित दवा चिकित्सक की सलाह पर लेते रहना चाहिए, लेकिन ब्रेन टीबी के मरीजों को जो डब्ल्यूएचओ की ओर से गाइड लाइन 2016 में तैयार कराई गई है, उसके अनुसार एक साल तक नियमित दवा लेनी होगी। यह जानने की बहुत जरूरत है कि टीबी की बीमारी किसी को भी हो सकती है। ऐसा इसलिए कि बचपन से ही सामान्य टीबी के बैक्टीरिया किसी न किसी रूप में प्रभावी होते हैं लेकिन वह नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं।
विज्ञापन
खून के रास्ते ब्रेन टीबी के मरीजों में पहुंचता है बैक्टीरिया
डॉ. प्रसाद ने बताया कि सामान्य टीबी खांसने और बैक्टीरिया से हवा से फैलता है, लेकिन ब्रेन टीबी के मरीजों में शरीर में ब्लड के रास्ते पहुंचता है। किसी वजह से जब भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है तो इसके उभरने का खतरा अधिक रहता है। ब्रेन टीबी में भी 30-40 प्रतिशत जान जाने का खतरा रहता है। कोरोना के दौर में भी जिन लोगों को ब्रेन टीबी हुआ उन्हें जरूरी स्टेरॉयड भी दिया गया।
डॉ. प्रसाद ने बताया कि सामान्य टीबी खांसने और बैक्टीरिया से हवा से फैलता है, लेकिन ब्रेन टीबी के मरीजों में शरीर में ब्लड के रास्ते पहुंचता है। किसी वजह से जब भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है तो इसके उभरने का खतरा अधिक रहता है। ब्रेन टीबी में भी 30-40 प्रतिशत जान जाने का खतरा रहता है। कोरोना के दौर में भी जिन लोगों को ब्रेन टीबी हुआ उन्हें जरूरी स्टेरॉयड भी दिया गया।
टीबी ग्रसित 30 प्रतिशत मरीज ब्रेन टीबी के
बीएचयू के न्यूरो वार्ड में भी ब्रेन टीबी के 30 से 40 प्रतिशत मरीज हैं। यह भी जानना जरूरी है कि जिसको सामान्य टीबी पहले हुआ है, उसमें ब्रेन टीबी का खतरा अधिक रहता है। सिरदर्द, बुखार, उल्टी, बेहोश हो जाना आदि इसके लक्षण हैं। कोरोना के बाद ब्रेन टीबी से ग्रसित होने वालों की संख्या बढ़ सकती है। अभी ऐसा हुआ है कि नहीं इस पर शोध की जरूरत है।