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वाराणसी में निभाई 355 साल की परंपरा, बेला और गुलाब से सजा मां दक्षिणेश्वरी का दरबार
Fri, 23 Apr 2021 08:58 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Fri, 23 Apr 2021 08:58 PM IST
सार
माता को लगा 151 किलो लड्डू का भोग, मां दक्षिणेश्वरी काली का हुआ वार्षिक शृंगार
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वाराणसी में भोजूबीर पंचक्रोशी मार्ग स्थित मां दक्षिणेश्वर काली जी का वार्षिक श्रृंगार ।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वाराणसी में मां दक्षिणेश्वरी काली का वार्षिक शृंगार शुक्रवार को हुआ। 355 साल पुरानी परंपरा के अनुसार महंत परिवार ने माता का पूजन व शृंगार किया। कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार मंदिर में श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया।
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शुक्रवार को माता की मंगला आरती से शृंगार महोत्सव का शुभारंभ हुआ। पूरे मंदिर परिसर को 51 किलो बेला, गुलाब, सवा कुंतल कामिनी की पत्तियों, माला और झालरों से सजाया गया। शाम को मंदिर के महंत राजेश गिरी और आचार्य पं. बृज बिहारी पाठक के निर्देशन में हवन पूजन और शृंगार हुआ। देर रात महंत परिवार ने मां काली का 108 बत्ती और सवा किलो कपूर से आरती उतारी।
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माता को 151 किलो लड्डू का भोग लगाया गया। शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद हुए। मंदिर का निर्माण 1666 में छत्रपति शिवाजी ने कराया था। इस दौरान मनोज जायसवाल, विजय प्रताप सिंह, सभापति सिंह और आनंद विक्रम सिंह आदि रहे।
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