बीएचयू विवादः ट्विटर यूजर्स के निशाने पर आए तारिक फतेह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तानी मूल के चर्चित लेखक तारिक फतह का शुक्रवार को ट्वीट कर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलपति प्रो. गिरिश चंद्र त्रिपाठी पर टिप्पणी करना महंगा पड़ गया। कई ट्विटर यूजर्स ने तारिक की टिप्पणी को आपत्तिजनक बताया और उनकी मंशा पर सवाल खड़े किए। हालांकि कई ऐसे भी थे जिन्होंने तारिक का समर्थन किया।
इससे पहले शुक्रवार को बीएचयू में राजनीति शास्त्र विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम विवाद में आ गया। विवाद तारिक फतह के ट्वीट से शुरू हुआ। तारिक फतह ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि कुलपति ने बीएचयू में उनका कार्यक्रम नहीं होने दिया। कुलपति ने आरोपों को निराधार बताया।
कनाडाई नागरिक तारिक ने ट्वीट कर लिखा कि जिस ऑडिटोरियम में कार्यक्रम होना था, उसकी बुकिंग कैंसल कर दी गई। हालांकि हकीकत यह रही कि बीएचयू केएन उडुप्पा सभागार में डेढ़ घंटे तक उनका कार्यक्रम हुआ, जिसमें करीब 500 लोगों के बीच 45 मिनट तक उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान ऐसा कुछ भी जाहिर नहीं हुआ कि बीएचयू प्रशासन ने प्रत्यक्ष तौर पर उनके कार्यक्रम को रोका हो।
कार्यक्रम के बाद ट्वीट कर तारिक फतह ने यह भी कहा कि उनको भाषण को बीच में रोकने की कोशिश की गई। हॉस्टल के छात्रों को कार्यक्रम में जाने से मना किया गया। उन्होंने दुख भी जाहिर किया कि अभिव्यक्ति के अधिकार का हिंदुस्तान में यही हश्र है।
हालांकि बीएचयू इसमें फेल हुआ। शाम को एक अन्य ट्वीट में उन्होंने फिर कहा, बीएचयू कुलपति ने कैंपस में मेरे भाषण को रोकने का असफल प्रयास किया। लूजर।
मीडिया ने मेरा गलत बयान छापाः प्रो केके मिश्रा
तारिक के इस ट्वीट के बाद कई ट्विटर यूजर्स ने उनकी कड़ी आलोचना की। खुद को चाणक्य भक्त बताने वाले एक यूजर ने इस कार्यक्रम के आयोजक केके मिश्रा और तारिक फतेह को टैग कर लिखा, केके मिश्रा जी आप तारिक फतेह की चापलूसी कर रहे हैं। देखिये (तारिक) भारत के टुकड़े करने की उम्मीदें रखता था।
एक अन्य यूजर लियाकत काजी ने लिखा, बीएचयू के कुलपति को किसी शत्रु देश के नागरिक को विश्वविद्यालय परिसर के अंदर आने से रोकने का पूरा अधिकार है। हालांकि कई यूजर्स ने तारिक का समर्थन भी किया।
एक यूजर बृजेश राय ने लिखा, यह शर्मनाक घटना है। कुलपति जी आप अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के बजाय ये क्या कर रहे हैं ?
वहीं शनिवार को इस मामले एक नया मोड़ आ गया। कार्यक्रम के आयोजक प्रो. केके मिश्रा ने कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनका गलत बयान छापा है। प्रो. मिश्रा ने कहा कि जो उन्होंने मंच से कहा था वो उस पर अभी भी कायम हैं।
प्रो. मिश्रा ने शुक्रवार को कहा था कि हॉस्टल के छात्रों को कार्यक्रम में आने से रोका गया है। ऑडिटोरियम की बुकिंग कैंसल करने का आरोप गलत है। कार्यक्रम के दौरान अपने स्वागत भाषण में भी प्रो. मिश्रा ने कहा था कि उन पर यह कार्यक्रम न करने का दवाब बनाया गया था।
कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने तारिक फतह के आरोप निराधार बताए
उधर, कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने तारिक फतह के आरोप निराधार और गलत बताए था। कहा, उन्हें (तारिक फतह) कुछ भी बोलने से पहले विश्वविद्यालय की व्यवस्था को समझना चाहिए। मुझे उनके कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं थी। कार्यक्रम रोकने का कोई सवाल ही नहीं।
कहा कि तारिक फतह जवाब दें कि उनका कार्यक्रम फिर बीएचयू में हुआ कैसे? हॉस्टल में किसी भी छात्र को कार्यक्रम में जाने से मना नहीं किया गया। कुलपति ने कहा, अगर कोई दिक्कत थी तो कार्यक्रम आयोजक प्रो. कौशल किशोर मिश्रा को मुझे बताना चाहिए था।
प्रो. मिश्र का पठन-पाठन से लेना-देना नहीं है। तीन महीने में उन्होंने 25 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार कराए और हमेशा तारिक फतह जैसे वक्ताओं को ही आमंत्रित किया है।
Sad. The Vice Chancellor of Banaras Hindu University @VCofficeBHU tries unsuccessfully to shut down my talk at the BHU Campus today. Loser. pic.twitter.com/BYTmUateYo
— Tarek Fatah (@TarekFatah) January 13, 2017