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यूपी: अपहरण कर नाबालिग से दुष्कर्म में तनवीर खान दोषी, 20 साल का कठोर कारावास; सात गवाहों का बयान हुआ दर्ज

Fri, 30 Oct 2026 05:20 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 30 Oct 2026 05:20 AM IST
सार

नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने तनवीर खान को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की 70 प्रतिशत राशि पीड़िता को दी जाएगी। अदालत में सात गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य पेश किए गए।

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Tanvir Khan convicted kidnapping and misdeed minor sentenced 20 years rigorous imprisonment statements
वाराणसी में सुनाया गया फैसला। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कैंट थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नितिन पांडेय की अदालत ने आरोपी तनवीर खान को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया है।

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विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह के अनुसार, घटना आठ मार्च 2023 की है। पीड़िता की मां ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि उनकी 14 वर्षीय बेटी सामान खरीदने बाजार गई थी, लेकिन काफी देर तक घर नहीं लौटी। खोजबीन के दौरान पता चला कि थाना क्षेत्र का निवासी तनवीर खान उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। इसके बाद कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने विवेचना की।

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अदालत ने सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में सात गवाह पेश किए। गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया। सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 15 वर्ष छह माह 17 दिन थी। 

अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 और 366 तथा पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में दोषी ने जो सजा जेल में काटी है उसे सजा में समायोजित करने का आदेश अदालत ने दिया। दोषसिद्ध को निर्णय की कॉपी निशुल्क प्रदान करने करने का आदेश भी अदालत ने दिया ताकि दोषी इस फैसले के खिलाफ अपील करना चाहे तो कर सके।

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