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शिल्पकला और आधुनिक तकनीक के सामंजस्य का प्रतीक है स्वर्वेद महामंदिर
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आध्यात्मिक राजधानी वाराणसी में तैयार हो रहा सबसे बड़ा साधना केंद्र स्वर्वेद महामंदिर शिल्पकला और आधुनिक तकनीक के अद्भुत सामंजस्य का प्रतीक है। विश्वनाथ धाम के साथ ही यह महा मंदिर काशी के धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व को और बढ़ाएगा। फिलहाल तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के लिए दुनिया भर के जिज्ञासु 10 दिसंबर के बाद से जुटने लगेंगे। विहंगम योग के जरिये नशा मुक्ति की राह प्रशस्त करने वाले आध्यात्मिक अभियान में हर वर्ष लाखों लोग जुड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 दिसंबर को महा मंदिर परिसर में आयोजित वार्षिकोत्सव में हिस्सा लेेंगे। इस दौरान दो लाख से ज्यादा जिज्ञासुओं के शामिल होने की उम्मीद है। 180 फीट ऊंचाई के सप्त तलीय महामंदिर परिसर में 100 फीट ऊंची सद् गुरुदेव की सैंड स्टोन की प्रतिमा भी स्थापित होगी।
स्वर्वेद महामंदिर धाम में मई 2017 में 21 हजार कुंडीय स्वर्वेद उत्तरार्द्ध ज्ञान महायज्ञ हुआ था। उस वक्त इसे इतिहास के सबसे विशालतम यज्ञ की संज्ञा भी दी गई थी। अब महामंदिर बनकर तैयार होने वाला है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं का वर्षाें पुराना सपना पूरा हो रहा है। वास्तुशिल्प का अद्भुत उदाहरण और 64 हजार वर्ग फीट में बन रहे सात मंजिला महामंदिर का निर्माण करीब 18 साल पहले शुरू हुआ था। अब स्वर्वेद के दोहे मंदिर में अंकित किए जा रहे हैं। मुख्य गुंबद 125 पंखुड़ियों के विशालकाय कमल पुष्प की तरह है। गुजरात में जीआरसी तकनीक द्वारा बनाए जा रहे नौ गुुंबद नौ कमलों की तरह होगा। मंदिर से जुड़े संतों ने बताया कि तीन लाख वर्ग फ ीट में गुलाबी पत्थरों की नक्काशी के लिए 350 से ज्यादा शिल्पी जुटे हैं। प्राचीन स्थापत्य कला के समन्वय से बन रहे इस दिव्य आध्यात्मिक केंद्र की एक झलक पाने के लिए दुनिया के अनुयायी उत्सुक हैं।
दीवारों पर अंकित होंगे स्वर्वेद के दोहे
महामंदिर में मकराना पत्थर पर स्वर्वेद के दोहेे अंकित होंगे। 50 हजार वर्ग फ ीट पर वाटर जेट तकनीक से पांच हजार दोहे उत्कीर्ण हो रहे हैं। महामंदिर को खूबसूरत बनाने के साथ ही वास्तुशिल्प का भी पूरा ध्यान रखा गया है। पूर्व दिशा में प्रवाहित नहर जल राशि के रूप में स्थापित है।
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महामंदिर एक नजर में
तीन लाख वर्ग फीट में दुर्लभ सफेद मकराना का प्रयोग
तीन लाख घन फीट में नक्काशीदार गुलाबी सैंड स्टोन
20 हजार साधकों के एक साथ बैठने की होगी व्यवस्था
238 क्षमता के दो अत्याधुनिक सभागार
180 फीट की ऊंचाई का सप्ततलीय महामंदिर
100 फीट ऊंची सद् गुरुदेव की सैंडस्टोन प्रतिमा
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स्वर्वेद महामंदिर धाम में मई 2017 में 21 हजार कुंडीय स्वर्वेद उत्तरार्द्ध ज्ञान महायज्ञ हुआ था। उस वक्त इसे इतिहास के सबसे विशालतम यज्ञ की संज्ञा भी दी गई थी। अब महामंदिर बनकर तैयार होने वाला है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं का वर्षाें पुराना सपना पूरा हो रहा है। वास्तुशिल्प का अद्भुत उदाहरण और 64 हजार वर्ग फीट में बन रहे सात मंजिला महामंदिर का निर्माण करीब 18 साल पहले शुरू हुआ था। अब स्वर्वेद के दोहे मंदिर में अंकित किए जा रहे हैं। मुख्य गुंबद 125 पंखुड़ियों के विशालकाय कमल पुष्प की तरह है। गुजरात में जीआरसी तकनीक द्वारा बनाए जा रहे नौ गुुंबद नौ कमलों की तरह होगा। मंदिर से जुड़े संतों ने बताया कि तीन लाख वर्ग फ ीट में गुलाबी पत्थरों की नक्काशी के लिए 350 से ज्यादा शिल्पी जुटे हैं। प्राचीन स्थापत्य कला के समन्वय से बन रहे इस दिव्य आध्यात्मिक केंद्र की एक झलक पाने के लिए दुनिया के अनुयायी उत्सुक हैं।
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दीवारों पर अंकित होंगे स्वर्वेद के दोहे
महामंदिर में मकराना पत्थर पर स्वर्वेद के दोहेे अंकित होंगे। 50 हजार वर्ग फ ीट पर वाटर जेट तकनीक से पांच हजार दोहे उत्कीर्ण हो रहे हैं। महामंदिर को खूबसूरत बनाने के साथ ही वास्तुशिल्प का भी पूरा ध्यान रखा गया है। पूर्व दिशा में प्रवाहित नहर जल राशि के रूप में स्थापित है।
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महामंदिर एक नजर में
तीन लाख वर्ग फीट में दुर्लभ सफेद मकराना का प्रयोग
तीन लाख घन फीट में नक्काशीदार गुलाबी सैंड स्टोन
20 हजार साधकों के एक साथ बैठने की होगी व्यवस्था
238 क्षमता के दो अत्याधुनिक सभागार
180 फीट की ऊंचाई का सप्ततलीय महामंदिर
100 फीट ऊंची सद् गुरुदेव की सैंडस्टोन प्रतिमा