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वाराणसी में 43 दिन तक चलेगा संगीत का महाकुंभ,आएंगे कई बड़े सितारे

Thu, 16 Mar 2017 03:12 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 16 Mar 2017 03:12 PM IST
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sur ganga samagam music festival start from 18 march in varanasi
महमूरगंज स्थित एक रेजीडेंसी में बुद्धिजीवियों, नागरिकों के साथ हुआ मंथन - फोटो : अमर उजाला
यूनेस्को के क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में बनारस को सिटी ऑफ म्यूजिक में शामिल करने के बाद काशी में 43 दिवसीय संगीत समागम शुरू होने जा रहा है। इसमें देश के जाने-माने कलाकारों के साथ क्षेत्रीय और स्थानीय कलाकार मंच साझा करेंगे।
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18 अप्रैल से शुरू होकर 30 मई तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में इसका आयोजन होगा। बुधवार को महमूरगंज स्थित एक रेजीडेंसी में मेयर रामगोपाल मोहले और मंडलायुक्त की अध्यक्षता में प्रबुद्ध नागरिकों के साथ बैठक हुई। बैठक में समारोह को भव्यता देने पर मंथन हुआ और लोगों के सुझाव लिए गए।  
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नगर निगम और प्रशासन की देखरेख में पहल समाजोत्कर्ष समिति को इस कार्यक्रम को कराने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति के अध्यक्ष आलोक पारिख ने कहा कि बनारस के सभी नए-पुराने संगीत और उससे जुड़े कलाकारों को जीवंतता देना, काशी की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाना और नए कलाकारों के लिए प्लेटफार्म देना है।
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इसमें देश और विदेश अमरीका, अफ्रीका, इटली, लंदन समेत 18 शहरों के कलाकार भाग लेंगे। मेयर रामगोपाल मोहले ने कहा कि काशी की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए सुर गंगा एक मजबूत माध्यम होगा।

इसमें काशी की सांस्कृतिक विरासत झलकेगी। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि काशी की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने की हम सबकी जिम्मेदारी है। 

संगीत महोत्सव की बैठक से दूर रहे कलाकार

sur ganga samagam music festival start from 18 march in varanasi
काशी में 18 अप्रैल से शुरू हो रहे 43 दिवसीय संगीत समागम की बैठक में शहर का कोई नामचीन कलाकार शामिल नहीं हो सका। मेयर रामगोपाल मोहले की ओर से आयोजित इस बैठक में शहर के बुद्धिजीवियों, प्रबुद्ध नागरिकों को मंथन के लिए आमंत्रित किया गया था। शिक्षा, चिकित्सा, उद्यमी से जुड़े लोग उपस्थित हुए लेकिन कोई संगीत से जुड़ा कोई कलाकार नहीं दिखा। 

कार्यक्रम का उद्देश्य
युवा कलाकारों को बढ़ावा देना, पर्यटन को बढ़ाना, गंगा सफाई से जोड़ना, उभरते कलाकारों में कौशल विकास, गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत करना शामिल है। कला के लिए स्टूडियो का निर्माण कराना है। 
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