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वाराणसी में भाजपा से दादा का टिकट कटने पर बदला समीकरण
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 25 Jan 2017 09:57 PM IST
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भाजपा विधायक श्याम देव राय चौधरी दादा
- फोटो : अमर उजाला
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पीएम के संसदीय क्षेत्र की दक्षिणी विधानसभा से सात बार के भाजपा विधायक श्याम देव राय चौधरी दादा का टिकट कटने से समीकरण बदल गए हैं। कार्यकर्ताओं का एक धड़ा पार्टी के इस फैसले से नाराज है।
वहीं, कैंट, रोहनिया, शिवपुर विधानसभा क्षेत्र में भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। माना जा रहा है कि दादा का टिकट कटने से बदले समीकरणों का असर शहर दक्षिणी के अलावा उत्तरी और कैंट विधानसभा क्षेत्र पर भी पड़ सकता है और भाजपा की चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
बीते 2012 के विधानसभा चुनाव में हुए नए परिसीमन में दक्षिणी का कुछ हिस्सा कैंट और उत्तरी में चला गया था।
जो हिस्से दक्षिण से कटे, उन्हें भाजपा का गढ़ माना जाता है। जबकि करीब एक नए मुस्लिम मतदाताओं वाला क्षेत्र दक्षिणी में आ गया।
हालांकि उस बदली परिस्थिति और सपा लहर के बावजूद दादा ने लगातार सातवीं बार यह सीट जीतकर भाजपा को दी थी।
अधिक उम्र का हवाला देते हुए पार्टी ने दादा को इस बार टिकट नहीं दिया।
इससे दादा के समर्थक नाराज हैं। पार्टी के अंदरखाने भी इसे लेकर चिंता पसरी है।
चर्चा है कि दादा का टिकट कटने के बाद के माहौल के मद्देनजर जल्द ही पार्टी की कोई उच्चस्तरीय कमेटी या कोई बड़ा पदाधिकारी यहां आ सकता है।
पार्टी में इसकी भी चर्चा है कि जब उत्तरी से रवींद्र जायसवाल का टिकट नहीं कटा और कैंट से ज्योत्सना श्रीवास्तव के बेटे को टिकट दिया गया।
ऐसे में दादा को ही दरकिनार क्यों कर दिया गया।
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वहीं, कैंट, रोहनिया, शिवपुर विधानसभा क्षेत्र में भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। माना जा रहा है कि दादा का टिकट कटने से बदले समीकरणों का असर शहर दक्षिणी के अलावा उत्तरी और कैंट विधानसभा क्षेत्र पर भी पड़ सकता है और भाजपा की चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
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बीते 2012 के विधानसभा चुनाव में हुए नए परिसीमन में दक्षिणी का कुछ हिस्सा कैंट और उत्तरी में चला गया था।
जो हिस्से दक्षिण से कटे, उन्हें भाजपा का गढ़ माना जाता है। जबकि करीब एक नए मुस्लिम मतदाताओं वाला क्षेत्र दक्षिणी में आ गया।
हालांकि उस बदली परिस्थिति और सपा लहर के बावजूद दादा ने लगातार सातवीं बार यह सीट जीतकर भाजपा को दी थी।
अधिक उम्र का हवाला देते हुए पार्टी ने दादा को इस बार टिकट नहीं दिया।
इससे दादा के समर्थक नाराज हैं। पार्टी के अंदरखाने भी इसे लेकर चिंता पसरी है।
चर्चा है कि दादा का टिकट कटने के बाद के माहौल के मद्देनजर जल्द ही पार्टी की कोई उच्चस्तरीय कमेटी या कोई बड़ा पदाधिकारी यहां आ सकता है।
पार्टी में इसकी भी चर्चा है कि जब उत्तरी से रवींद्र जायसवाल का टिकट नहीं कटा और कैंट से ज्योत्सना श्रीवास्तव के बेटे को टिकट दिया गया।
ऐसे में दादा को ही दरकिनार क्यों कर दिया गया।
पार्टी पूछती तो बताता प्रत्याशी का नाम: दादा
भाजपा
शहर दक्षिणी से लगातार सात बार के विधायक दादा अपना टिकट कटने से नाराज नहीं हैं लेकिन जिस आधार पर उनका टिकट काटा गया, उससे वह बेहद आहत हैं।
उनका सीधा सवाल है कि आयुसीमा के आधार पर उनका टिकट काटने की बात कही जा रही है तो दूसरे जिलों में उनसे अधिक उम्र के प्रत्याशियों को टिकट कैसे मिल गया ? दादा कहते हैं कि पार्टी उनसे पूछती तो वह खुद प्रत्याशी का नाम बताते लेकिन टिकट काटने से पहले पार्टी ने न कुछ पूछा न बताया।
बकौल दादा, कुछ जगहों के प्रत्याशी उम्र में उनसे बड़े हैं। कुशीनगर से गंगा सिंह कुशवाहा को टिकट दिया गया है। उनकी जन्मतिथि एक जुलाई 1936 है। जबकि दादा की जन्मतिथि 22 जून 1939 है।
इसी तरह, मेरठ से सत्य प्रकाश अग्रवाल को टिकट दिया गया है और उनकी जन्मतिथि सात जुलाई 1939 है। इस बीच, दक्षिणी के प्रत्याशी नीलकंठ तिवारी भी दादा का आशीर्वाद लेने पहुंचे। मोबाइल से उनके साथ फोटो भी ली। इस दौरान महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि भी मौजूद थे।
उनका सीधा सवाल है कि आयुसीमा के आधार पर उनका टिकट काटने की बात कही जा रही है तो दूसरे जिलों में उनसे अधिक उम्र के प्रत्याशियों को टिकट कैसे मिल गया ? दादा कहते हैं कि पार्टी उनसे पूछती तो वह खुद प्रत्याशी का नाम बताते लेकिन टिकट काटने से पहले पार्टी ने न कुछ पूछा न बताया।
बकौल दादा, कुछ जगहों के प्रत्याशी उम्र में उनसे बड़े हैं। कुशीनगर से गंगा सिंह कुशवाहा को टिकट दिया गया है। उनकी जन्मतिथि एक जुलाई 1936 है। जबकि दादा की जन्मतिथि 22 जून 1939 है।
इसी तरह, मेरठ से सत्य प्रकाश अग्रवाल को टिकट दिया गया है और उनकी जन्मतिथि सात जुलाई 1939 है। इस बीच, दक्षिणी के प्रत्याशी नीलकंठ तिवारी भी दादा का आशीर्वाद लेने पहुंचे। मोबाइल से उनके साथ फोटो भी ली। इस दौरान महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि भी मौजूद थे।