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अगर ऐसा हुआ तो आप भी ले सकेंगे सुपर लग्जरियस ट्रेनों में सफर का मजा

Fri, 13 Apr 2018 11:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 13 Apr 2018 11:08 AM IST
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Super luxurious train ticket fare will be gone chep
प्रमुख ट्रेनों में किराया घटाने पर मंथन कर रहा रेलवे बोर्ड - फोटो : facebook
देश की सुपर लग्जरियस ट्रेनों में सफर का सपना अब पूरा हो सकेगा। महाराजा एक्सप्रेस और पैलेस ऑन व्हील्स जैसी लक्जरी टूरिस्ट ट्रेनों में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए किराए में कमी लाने की कवायद चल रही है। रेलवे ने अपने हॉलेज शुल्क को आधा कर दिया है।
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इसके अलावा कई और प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह संकेत दिए हैं। देश में पांच लग्जरी ट्रेनें महाराजा एक्सप्रेस, गोल्डन चैरियट, रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स , डेक्कन ओडिशी तथा पैलेस ऑन व्हील्स  संचालित होती हैं।
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रेल अधिकारियों की मानें तो हॉलेज शुल्क घटाने के साथ ही रेलवे बोर्ड ने राज्य पर्यटन निगमों को लक्जरी टूरिस्ट ट्रेनों का किराया घटाने तथा छोटे तथा आकर्षक टूर पैकेज तैयार करने का सुझाव रेल मंत्रालय ने दिया है।
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हॉलेज शुल्क घटाने का निर्णय संसदीय समिति की रिपोर्ट पर लिया गया है। जिसके अनुसार 2012-13 से 2016-17 के पांच सालों में पांचों लक्जरी टूरिस्ट ट्रेनों का यात्री प्रतिशत 30-36 के बीच रहा।

यात्री प्रतिशत बढ़ाने के लिए समिति ने इन ट्रेनों के लंबे व महंगे यात्रा पैकेजों को छोटा व किफायती बनाने तथा मुफ्त कांप्लीमेंट्री पास बंद करने का सुझाव दिया गया है।

यह है हॉलेज शुल्क

Super luxurious train ticket fare will be gone chep
सुपर लग्जरियस ट्रेन - फोटो : facebook

आईआरसीटीसी के पीआरओ सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि  रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल बोर्ड स्तर पर अभी ऐसा कोई निर्देश नहीं आया है।

टूरिस्ट ट्रेन चलाने वाली एजेंसियों से जो शुल्क रेलवे लेता है उसे हॉलेज शुल्क कहते हैं। अपने आधारभूत ढांचे और स्टाफ  के उपयोग के लिए यह शुल्क लिया जाता है।

इनमें रेलवे के साथ साझेदारी पर लग्जरी टूरिस्ट ट्रेेनें चलाने वाले विभिन्न राज्यों के पर्यटन निगम शामिल हैं जो रेलवे के साथ साझेदारी में लक्जरी टूरिस्ट ट्रेनें चलाते हैं। इनसे होने वाली आमदनी का आधा हिस्सा रेलवे को मिलता है।
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