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हॉकी के उस्ताद मोहम्मद शाहिद: हर जीत के बाद घर ले आते थे गेंद, आज भी आलमारी में सहेजकर रखी हैं 24 गेंदें

Tue, 30 Jul 2024 03:50 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 30 Jul 2024 03:50 PM IST
सार

हॉकी के उस्ताद मोहम्मद शाहिद के पदकों को उनकी पत्नी ने आज भी आलमारी में सहेजकर रखा है। 44 साल पहले 29 जुलाई को ओलंपिक में मोहम्मद शाहिद ने गोल किया था। कई प्रतियोगिताओं की ट्रॉफियां आज भी घर में चमचमा रही हैं। 

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story of Olympian and hockey player Mohammad Shahid in varanasi
हॉकी के उस्ताद मोहम्मद शाहिद व उनकी पत्नी परवीन शाहिद - फोटो : स्वयं

विस्तार

हॉकी के उस्ताद मोहम्मद शाहिद का जोश और जज्बा गजब का था। उनकी सुबह हॉकी स्टिक और बॉल की खटपट से होती थी। कुर्सी पर बैठकर ड्रिब्लिंग करते थे। मेहनत का यह सिलसिला घर से मैदान तक दिन रात जारी रहता था। कड़ी मेहनत से जीती उनकी ट्रॉफियां मकबूल आलम रोड पर उनके घर में चमचमा रही हैं। ओलंपिक में आठवें स्वर्ण पदक की चमक आज भी बरकरार है। पदकों की देखभाल मोहम्मद शाहिद की पत्नी परवीन शाहिद करती हैं। हॉकी वाराणसी के अध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने बताया कि 44 साल पहले 29 जुलाई 1980 को मॉस्को ओलंपिक में स्पेन को 4-3 से हराकर भारत ने स्वर्ण पदक जीता। इसमें मोहम्मद शाहिद ने निर्णायक गोल किया था। इससे पहले 1976 कनाडा में भारतीय टीम सातवें स्थान पर रही थी।

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परवीन शाहिद ने बताया कि प्रतिदिन पदकों की सफाई की जाती है। इन्हें साफ करने में तीन घंटे लगते हैं। बताया कि उनके पति ने बांस की छोटी सी हॉकी से खेलना शुरू किया था। उस समय छोटे साइज की हॉकी नहीं मिलती थी। पुलिसलाइन से शुरू हुआ उनका सफर तीन ओलंपिक तक चला।
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पद्मश्री और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित मोहम्मद शाहिद के असमय निधन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी यादों को संजोने का काम किया। उनकी स्मृति में हर साल ऑल इंडिया मोहम्मद शाहिद प्राइज मनी हॉकी प्रतियोगिता वाराणसी में होती है। लखनऊ में गोमती नगर में मोहम्मद शाहिद के नाम से हॉकी का आधुनिक स्टेडियम भी बन रहा है।

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मां कपड़े में पत्थर बांधकर बनाती थीं बॉल

परवीन शाहिद ने बताया कि घर में बड़ी दीदी और मां उनसे परेशान रहती थीं। घर में हॉकी स्टिक या लकड़ी जो भी मिलता उससे खेलने लगते। रसोई घर में कटोरी, ग्लास तक को हॉकी स्टीक से इधर-उधर करते थे। बचपन में उनकी मां ने बड़े भाई की हॉकी तोड़ दी थी। साथ ही उसे छोटा कर और कपड़े में पत्थर बांधकर उसे बॉल बना देती थीं। इसी से मोहम्मद शाहिद अभ्यास किया करते थे।

आज भी आलमारी में 24 बॉल

परवीन शाहिद ने बताया कि मोहम्मद शाहिद मैच जीतने के बाद बॉल ले आते थे। आज भी उनके घर की आलमारी में 24 बॉल रखे हुए हैं। आलमारी में मोहम्मद शाहिद के चित्र के एक तरफ भगवान राम तो दूसरी ओर इबादतगाह की अनुकृति रखी हुई है। उसके बगल में लक्ष्य पर निशाना साधते अर्जुन की अनुकृति रखी हुई है। घरवालों को इसे हटाने की मनाही है।
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