{"_id":"63a0b99886dafc6f3a695d94","slug":"st-paul-s-church-designed-by-british-architect-varanasi-news-vns689453757","type":"story","status":"publish","title_hn":"St Paul's Church Varanasi: अद्भुत है चर्च की वास्तुकला, इंग्लैंड से मंगाई गई थीं तीन घड़ियां आकर्षण का केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
St Paul's Church Varanasi: अद्भुत है चर्च की वास्तुकला, इंग्लैंड से मंगाई गई थीं तीन घड़ियां आकर्षण का केंद्र
Tue, 20 Dec 2022 07:46 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Dec 2022 07:46 AM IST
सार
प्रोटेस्टेंट मसीही समुदाय के इस प्राचीन चर्च की इमारत आज भी वैसे ही खड़ी है। 1841 में निर्माण के बाद से चर्च का संचालन इंग्लैंड मिशनरी सोसाइटी करती थी। आजादी के बाद 1970 में जब चर्च ऑफ नॉर्थ ईस्ट संस्था बनी तो यह भी उससे संबद्ध हो गया। वर्तमान में पादरी सैम जोशुआ बताते हैं कि चर्च में टंगा घंटा 150 किलो का है। जो ब्रिटेन से मंगाकर टांगा गया था।
विज्ञापन
St Paul's Church Varanasi
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ब्रिटिश वास्तुकला का शानदार उदाहरण सिगरा का सेंट पॉल चर्च ने बेशकीमती इतिहास समेटे रखा है। चर्च में आज भी ऐसी धरोहर है जो सैकड़ों साल से उसी रूप में है। उस समय इंग्लैंड से मंगाई गईं तीन घड़ियां आज भी मौजूद हैं। एक दौर ऐसा भी था कि इन घड़ियों का घंटा बजते ही पूरे शहर के लोग अपनी घड़ी की सुई मिलाते थे। बनारस आने वाले सैलानियों के लिए आज भी यह आकर्षण का केंद्र रहता है। सवा सौ फीट लंबा चर्च दूर से ही दिख जाता है। लखोटिया ईंट से खड़े इस चर्च को अंग्रेज आर्किटेक्ट जॉन पॉल ने तैयार किया था।
प्रोटेस्टेंट मसीही समुदाय के इस प्राचीन चर्च की इमारत आज भी वैसे ही खड़ी है। 1841 में निर्माण के बाद से चर्च का संचालन इंग्लैंड मिशनरी सोसाइटी करती थी। आजादी के बाद 1970 में जब चर्च ऑफ नॉर्थ ईस्ट संस्था बनी तो यह भी उससे संबद्ध हो गया। वर्तमान में पादरी सैम जोशुआ बताते हैं कि चर्च में टंगा घंटा 150 किलो का है। जो ब्रिटेन से मंगाकर टांगा गया था।
सिगरा और महमूरगंज इलाके के क्रिश्चियन कॉलोनी के लोग यहां प्रार्थना करते हैं। रविवार के अलावा यहां क्रिसमस, न्यू ईयर, गुड फ्राइडे, ईस्टर, मसीही और रोजा जैसे त्योहारों पर मसीही कलिसिया जुटती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रोटेस्टेंट मसीही समुदाय के इस प्राचीन चर्च की इमारत आज भी वैसे ही खड़ी है। 1841 में निर्माण के बाद से चर्च का संचालन इंग्लैंड मिशनरी सोसाइटी करती थी। आजादी के बाद 1970 में जब चर्च ऑफ नॉर्थ ईस्ट संस्था बनी तो यह भी उससे संबद्ध हो गया। वर्तमान में पादरी सैम जोशुआ बताते हैं कि चर्च में टंगा घंटा 150 किलो का है। जो ब्रिटेन से मंगाकर टांगा गया था।
विज्ञापन
सिगरा और महमूरगंज इलाके के क्रिश्चियन कॉलोनी के लोग यहां प्रार्थना करते हैं। रविवार के अलावा यहां क्रिसमस, न्यू ईयर, गुड फ्राइडे, ईस्टर, मसीही और रोजा जैसे त्योहारों पर मसीही कलिसिया जुटती हैं।
विज्ञापन