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200 साल पहले बने इस चर्च में दिखती है गंगा-जमुनी की तहजीब, दीवारों पर लिखें हैं गीता के श्लोक
Wed, 25 Dec 2019 02:12 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Wed, 25 Dec 2019 02:12 PM IST
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सेंट मेरीज गिरजाघर की दीवारों पर लिखें गीता के श्लोक
- फोटो : अमर उजाला
बनारस के सबसे पुराने चर्च में गंगा-जमुनी की तहजीब अलग तरह से ही नजर आती है। 200 साल पहले बने कैंटोमेंट के सेंट मेरीज महागिरजाघर की दीवारों पर गीता के श्लोक लिखे हैं। चर्च की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी बाहरी दीवारों पर ईसा मसीह के संदेश लिखे हैं तो भीतरी दीवार पर गीता के श्लोक सर्वधर्म समभाव को दर्शाते हैं।
क्रिसमस पर यहां तीन दिनों तक मेले का आयोजन होता है। भव्य मेले के बहाने सभी धर्म के लोगों की जुटान होती है, जो काशी की गंगा- जमुनी तहजीब को प्रदर्शित करता है।
सेंट मेरीज गिरजा के विजिटर बुक में उस समय शहर में रहने वाले यूरोपीय नागरिकों का पूरा विवरण दर्ज था। इसी पुस्तिका पर एनी बेसेंट और 1960 में बनारस आगमन पर महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने संदेश लिखा था जो गायब हो गया है। काशी के इतिहास के गवाह इस चर्च का अपना इतिहास ही गड़बड़ हो गया है।
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क्रिसमस पर यहां तीन दिनों तक मेले का आयोजन होता है। भव्य मेले के बहाने सभी धर्म के लोगों की जुटान होती है, जो काशी की गंगा- जमुनी तहजीब को प्रदर्शित करता है।
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सेंट मेरीज गिरजा के विजिटर बुक में उस समय शहर में रहने वाले यूरोपीय नागरिकों का पूरा विवरण दर्ज था। इसी पुस्तिका पर एनी बेसेंट और 1960 में बनारस आगमन पर महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने संदेश लिखा था जो गायब हो गया है। काशी के इतिहास के गवाह इस चर्च का अपना इतिहास ही गड़बड़ हो गया है।
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आम धारणा है कि इसका निर्माण 1812 में शुरू हुआ और चर्च दो साल में बनकर तैयार हो गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश टूरिज्म की वेबसाइट पर भी यही सूचना दर्ज है। हालांकि जेम्स प्रिंसेप ने चर्च ने स्टिपल की जो डिजाइन बनाई है, उस पर 1822 की तिथि अंकित है। पूर्व सूचना आयुक्त डा. ओपी केजरीवाल के मुताबिक चर्च वर्ष 1817 में बनना शुरू हुआ और 1824 में कोलकाता के तत्कालीन बिशप रेजिनाल्ड हेबर ने इसका उद्घाटन किया था।