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सोनभद्रः NCL के दो कोल भंडारों में लगी आग, हजारों टन कोयला खाक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Wed, 23 May 2018 08:29 PM IST
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एनसीएल खड़िया क्षेत्र की घटना, प्रबंधन में हड़कंप
- फोटो : अमर उजाला
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नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के सोनभद्र जिले के खडिय़ा क्षेत्र में स्थित दो कोयला भंडारों में पिछले दिनों लगी आग से कई हजार टन कोयला राख में तब्दील हो गया। आग पर काबू पाने का प्रयास नाकाम होने से कोल प्रबंधन में खलबली मची हुई है।
कोल फील्ड्स की पूरी मशीनरी आग पर काबू पाने में लगी हुई है। उम्मीद है कि एक दो दिनों में स्थिति सामान्य हो जाए।एनसीएल खडिय़ा क्षेत्र के खदान में स्थित कोल व वेस्ट सेक्शन में कोयला भंडार बनाया गया है। इन भंडारों में कई लाख टन कोयले का स्टाक है।
बताते हैं कि आग करीब सप्ताह भर पूर्व वेस्ट सेक्शन के भंडार में लगी। इसे बुझाने का प्रयास शुरू हुआ, इसी बीच वेस्ट से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित कोल सेक्शन के भंडार में भी आग लग गई। शुरू में मामले को दबाने की कोशिश हुई लेकिन आग का दायरा बढ़ा तो सबकुछ बेपरदा हो गया।
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परियोजना के कर्मचारियों की मानें तो छोटे से हिस्से में आग लगने की खबर पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसी वजह से इसका दायरा बढ़ता गया और भंडारों में एकत्रित कई हजार टन कोयला सुलगते हुए राख में तब्दील होता रहा। आग बुझाने के इंतजाम फेल होने के चलते यह क्रम जारी है।
कर्मचारियों ने यह भी बताया कि जलते हुए स्टाक से कोयले को हटाना भी मुश्किल साबित हो रहा है। यह अलग बात है कि भंडारों के कुछ हिस्से में पानी डाल कर आग बुझाने के बाद कोयला स्टाक कम करने की कोशिश की जा रही है।
आग से एनसीएल खड़िया को कितनी क्षति हुई इसकी अधिकारिक जानकारी नहीं हो सकी लेकिन माना जा रहा है कि नुकसान करोड़ों में है।
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कोल फील्ड्स की पूरी मशीनरी आग पर काबू पाने में लगी हुई है। उम्मीद है कि एक दो दिनों में स्थिति सामान्य हो जाए।एनसीएल खडिय़ा क्षेत्र के खदान में स्थित कोल व वेस्ट सेक्शन में कोयला भंडार बनाया गया है। इन भंडारों में कई लाख टन कोयले का स्टाक है।
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बताते हैं कि आग करीब सप्ताह भर पूर्व वेस्ट सेक्शन के भंडार में लगी। इसे बुझाने का प्रयास शुरू हुआ, इसी बीच वेस्ट से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित कोल सेक्शन के भंडार में भी आग लग गई। शुरू में मामले को दबाने की कोशिश हुई लेकिन आग का दायरा बढ़ा तो सबकुछ बेपरदा हो गया।
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परियोजना के कर्मचारियों की मानें तो छोटे से हिस्से में आग लगने की खबर पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसी वजह से इसका दायरा बढ़ता गया और भंडारों में एकत्रित कई हजार टन कोयला सुलगते हुए राख में तब्दील होता रहा। आग बुझाने के इंतजाम फेल होने के चलते यह क्रम जारी है।
कर्मचारियों ने यह भी बताया कि जलते हुए स्टाक से कोयले को हटाना भी मुश्किल साबित हो रहा है। यह अलग बात है कि भंडारों के कुछ हिस्से में पानी डाल कर आग बुझाने के बाद कोयला स्टाक कम करने की कोशिश की जा रही है।
आग से एनसीएल खड़िया को कितनी क्षति हुई इसकी अधिकारिक जानकारी नहीं हो सकी लेकिन माना जा रहा है कि नुकसान करोड़ों में है।
नियमों की अनदेखी बनी वजह
कोयला क्षेत्र में कार्य करने वाले जानकारों की मानें तो कोल भंडारण में नियमों की अनदेखी से इस तरह की घटनाएं होती है। कायदे से बड़ा कोल स्टाक बनाते हुए परत दर परद कोयले को बड़ी मशीनों से दबाया जाता है।
ताकि भंडार में जमा कोयले को आक्सीजन नहीं मिल सके लेकिन ऐसा नहीं किए जाने पर तेज धूप और गर्मी के साथ आक्सीजन का समावेश भंडार में होता है और आग पकड़ लेती है।
नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के प्रवक्ता सीरज कुमार सिंह ने कहा कि आग बुझाने के लिए सभी स्तरों पर उपलब्ध संसाधनों के जरिए जोर शोर से काम किया जा रहा है। एक से दो दिन के अंदर आग पर पूरी तरह काबू पा लिया जाएगा।