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सरहद पार मसजिदों के दरवाजे खोलें : सोनल मानसिंह सोनल मानसिंह

Sun, 12 Apr 2015 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी Updated Sun, 12 Apr 2015 02:31 AM IST
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Sonal Mansingh Reach In Sankat Mochan Sangeet Samaroh
वाराणसी। संकट मोचन मंदिर में मशहूर पाकिस्तानी गजल गायक उस्ताद गुलाम अली की गायकी के बाद काशी से सांस्कृतिक कूटनीति शुरू हो गई है। यह बात ओडिसी नृत्यांगना सोनल मानसिंह ने कही। पं. छन्नूलाल मिश्र ने जहां मंदिर में गजलों गाने पर उंगली हंगामा खड़ा कर दिया था, वहीं शनिवार की रात सोनल मानसिंह ने पुरजोर शब्दों में भारतीय कलाकारों के लिए पाकिस्तान की मसजिदों के दरवाजे खोलने की वकालत कर इस बहस को एक कदम आगे बढ़ा दिया।
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दिल्ली से संकट मोचन के दरबार पहुंची सोनल मानसिंह ने गुलाम अली के मंदिर में आकर गजल गाने को भारतीय सद्भाव और मजहबी स्वतंत्रता की बड़ी मिसाल के तौर पर पेश किया। उन्होंने संकट मोचन के दर्शन और परिक्रमा के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गुलाम अली को मंदिर में लाकर हमने दिखा दिया है। अब सरहद पार पाकिस्तान में भी मसजिदों के दरवाजे भारतीय कलाकारों के लिए खुलने
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चाहिए। सोनल ने कहा कि इससे भारत-पाकिस्तान के बीच संगीत-कला के आदान-प्रदान की नई राह खुली है। अब पाकिस्तान में भारतीय कलाकारों के लिए दरवाजे खुलने चाहिए। उन्होंने संगीत को साधना और तपस्या की चीज बताया। कहा कि संगीत परमात्मा का रुप है। इसे पाने के लिए पूरा जीवन खपाना पड़ता है। नई पीढ़ी को उन्होंने सलाह दी कि वो पूरी ईमानदारी और तन्मयता से रियाज करे। बिना मेहनत के सफलता नहीं मिलती।
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