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काशी में बेटे ने पेश की मिशाल, मां को कांवर में बैठाकर करा रहा पंचक्रोशी यात्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 28 May 2018 10:27 AM IST
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शिवेश मिश्रा
- फोटो : self
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एक तरफ जहां पैसे के लिए बेटों ने एक मां के शव को चार महीने तक घर में रखा वहीं एक बेटा ऐसा भी है जो अपनी अशक्त मां को कांवर में लेकर पंचक्रोशी तीर्थ यात्रा कराने के लिए पैदल ही निकल पड़ा।
कलियुग का श्रवण कुमार जब मां को कंधे पर लेकर निकले तो देखने वाले देखते ही रह गए। बूढ़ी मां को कांवर में बिठाकर शिवेश मिश्रा 80 किलोमीटर की पंचक्रोशी यात्रा पर नंगे पांव ही निकल पड़ा है।
पिछले 41 सालों से पंचक्रोशी यात्रा कर रहे शिवेश की यह यात्रा तो सबसे खास और यादगार है। कंधे पर कांवर में मां को लेकर निकले शिवेश की मां बिंदा भी उसे दुआएं देते हुए थक नहीं रही थी।
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पक्के महाल के रहने वाले शिवेश ने बताया कि सात साल की उम्र से ही वह पंचक्रोशी की यात्रा कर रहा है। 41 सालों की जो तपस्या थी अब पूर्ण हो गई। जिस मां ने मुझे नौ महीने तक कोख में रखा और बड़ा किया।
उस मां को कंधे पर लेकर पंचक्रोशी कराने निकला हूं तो इसकी अनूभूति को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। दो दिनों से मां को कावड़ (पालकी) में लेकर पंचकोशी यात्रा के दौरान शिवेश को जो देखता है देखता ही रह जाता है।
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कलियुग का श्रवण कुमार जब मां को कंधे पर लेकर निकले तो देखने वाले देखते ही रह गए। बूढ़ी मां को कांवर में बिठाकर शिवेश मिश्रा 80 किलोमीटर की पंचक्रोशी यात्रा पर नंगे पांव ही निकल पड़ा है।
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पिछले 41 सालों से पंचक्रोशी यात्रा कर रहे शिवेश की यह यात्रा तो सबसे खास और यादगार है। कंधे पर कांवर में मां को लेकर निकले शिवेश की मां बिंदा भी उसे दुआएं देते हुए थक नहीं रही थी।
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पक्के महाल के रहने वाले शिवेश ने बताया कि सात साल की उम्र से ही वह पंचक्रोशी की यात्रा कर रहा है। 41 सालों की जो तपस्या थी अब पूर्ण हो गई। जिस मां ने मुझे नौ महीने तक कोख में रखा और बड़ा किया।
उस मां को कंधे पर लेकर पंचक्रोशी कराने निकला हूं तो इसकी अनूभूति को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। दो दिनों से मां को कावड़ (पालकी) में लेकर पंचकोशी यात्रा के दौरान शिवेश को जो देखता है देखता ही रह जाता है।