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समय से मिले सुविधाएं तो बचाई जा सकती है नवजात बच्चों की जान

Tue, 14 Jan 2020 01:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jan 2020 01:09 AM IST
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SNCU ward
वाराणसी। कोटा में बच्चों की मौत की खबर ने तो लोगों को झकझोर कर रख दिया है। आम तौर पर शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग बच्चों के इलाज को लेकर सरकारी अस्पतालों का ही रू ख करते हैं। वहीं सुविधा संपन्न लोग निजी अस्पतालों को तरजीह देते हैं। बात अगर सरकारी अस्पतालों में बच्चों के इलाज की सुविधाओं की तो यहां महिला अस्पताल कबीरचौरा को छोड़ किसी भी अस्पताल में एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) की व्यवस्था नहीं है। कहने को तो यहां पीएचसी-सीएचसी पर भी डिलेवरी भी होती हैं लेकिन अगर किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ जाए तो उसे दूसरे अस्पतालों में रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है।
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हर महीने आठ हजार बच्चों का जन्म
विभागीय आंकड़ों की बात करें तो औसतन बनारस में हर महीने आठ हजार बच्चों का जन्म होता है, इसमें 100 से 150 बच्चों की मौत भी होती है। अगर संसाधनों की कमी से मौत की बात करें तो सूत्रों के अनुसार इसमें करीब 20 से 30 बच्चों को समय से सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। महिला अस्पताल की बात करें तो यहां दिसंबर माह में जन्में 498 बच्चों में आठ की मौत हुई। इसमें अधिकांश की उम्र एक महीने या इससे कम रही है।
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चार अस्पताल, चार सीएचसी, 24 स्वास्थ्य केंद्र
जिले में सरकारी अस्पतालों की बात करें तो बीएचयू को छोड़कर एक मंडलीय अस्पताल समेत चार जिला अस्पताल, चार सीएचसी, 24 पीएचसी पर मरीजों के इलाज की सुविधाएं हैं। इसमें जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा के अलावा सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर डिलेवरी की सुविधा है। इसके अलावा 300 से अधिक निजी अस्पताल, नर्सिंग होम भी हैं, जहां डिलेवरी भी होती है।
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सरकारी अस्पतालों में वेंटीलेटर नहीं
जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा सहित जितने भी सरकारी अस्पताल हैं, वहां बच्चों के वार्ड में बेड तो हैं, लेकिन अगर इलाज में वेंटीलेटर की जरूरत पड़ गई तो परिजनों को या तो बीएचयू या फिर निजी अस्पताल ले जाना पड़ता है। महिला अस्पताल के छह बेड वाले एसएनसीयू में भी केवल वार्मर ही हैं। यहां भी अब तक वेंटीलेटर नहीं लग पाया है। इसके अलावा चोलापुर और आराजीलाइन में भी चार-चार बेड का मॉर्डन न्यू बार्न केयर यूनिट है। यहां भी वेंटीलेटर नही हैं। ऐसे में समय से सुविधाएं न मिलना भी नवजात बच्चों की जान जाने की वजह है।
मौत की और भी वजह
बच्चाें के मौत की वजह कई होती है। इसमें सुविधाओं के साथ ही समय से पहले जन्म, मानक से कम वजन, जन्मजात बीमारियाें का समुचित इलाज न होना, संक्रमण, हार्ट और ब्रेन संबंधी बीमारियों की वजह से भी मौत हो सकती है।

अस्पतालों में बच्चों के इलाज को लेकर सुविधाओं की समीक्षा के बाद रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। विशेषकर बाल रोग विभाग में सुविधाएं बढ़ाने, संस्थागत प्रसव बढ़ाने आदि पर जोर दिया जा रहा है। बच्चों की मौत की कई वजहें होती हैं, कोशिश की जा रही है कि शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जाए।-डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ
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