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पॉलिथीन पर प्रतिबंध से चमकेगा कुटीर उद्योग, कारोबारियों में जगी उम्मीद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 06 Jul 2018 03:40 PM IST
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पॉलिथीन मुक्त वाराणसी के लिए अभियान
- फोटो : अमर उजाला
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पॉलिथीन पर प्रतिबंध से एक बार फिर कुटीर उद्योग की बेहतरी की उम्मीद जग गई है। अब ठोंगे, कपड़े के बैग सरीखे कुटीर उद्योग चमकेगे। अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे ऐसे उद्योग से जुड़े कारोबारियों में नई उम्मीद जग गई है। यह रोजगार देने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी सहायक होगा।
दो दशक पहले दुकानों व प्रतिष्ठानों पर सामान कागज के ठोंगा व दोना में दिया जाता रहा है। पॉलिथीन के चलन ने इस इस कुटीर उद्योग को लगभग खत्म कर दिया। धीरे-धीरे कागज के लिफाफों की जगह पॉलिथीन ने ले लिया।
कपड़े और जूट के थैले व लकड़ी की डलिया का इस्तेमाल सामान लाने के लिए किया जाता था। इस पर भी पॉलिथीन बाजार ने दखल दे दिया और यह चलन से बाहर हो गया। दोना, जूट के थैले के उद्योग से काफी लोगों को रोजगार मिलता था। इससे अच्छी-खासी आमदनी भी होती थी।
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पॉलिथीन के चलन ने कई परिवारों की रोजी-रोटी छीन ली। शहर में प्रदूषण बढ़ा सो अलग से। छोटे दुकानदारों का कहना है कि सरकार की सख्ती और जागरूकता अभियान से पॉलिथीन की बिक्री में कमी आई है। लेकिन चाइना की पॉलिथीन अब भी बिक रही है।
बाजार में 70 फीसदी से अधिक चाइना पॉलिथीन का कारोबार हो रहा है। सस्ता होने के साथ मजबूती के चलते इसकी डिमांड है। कुटीर उद्योग से जुड़े रोहित राज, श्याम नारायण केसरवानी व मोहित ने शासन-प्रशासन के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। इससे काफी हद तक बेरोजगारी दूर होगी।
आयोजनों में दिखने लगे दोना-पत्तल
पॉलिथीन पर रोक का असर दिखने लगा है। जागरूकता का असर है कि कुछ आयोजनों में लकड़ी के चम्मच, दोना, पत्तल नजर आने लगे हैं। कागज के लिफाफे, कुल्हड़, दोना-पत्तल, कागज के कप व ग्लास के उत्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद है।
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दो दशक पहले दुकानों व प्रतिष्ठानों पर सामान कागज के ठोंगा व दोना में दिया जाता रहा है। पॉलिथीन के चलन ने इस इस कुटीर उद्योग को लगभग खत्म कर दिया। धीरे-धीरे कागज के लिफाफों की जगह पॉलिथीन ने ले लिया।
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कपड़े और जूट के थैले व लकड़ी की डलिया का इस्तेमाल सामान लाने के लिए किया जाता था। इस पर भी पॉलिथीन बाजार ने दखल दे दिया और यह चलन से बाहर हो गया। दोना, जूट के थैले के उद्योग से काफी लोगों को रोजगार मिलता था। इससे अच्छी-खासी आमदनी भी होती थी।
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पॉलिथीन के चलन ने कई परिवारों की रोजी-रोटी छीन ली। शहर में प्रदूषण बढ़ा सो अलग से। छोटे दुकानदारों का कहना है कि सरकार की सख्ती और जागरूकता अभियान से पॉलिथीन की बिक्री में कमी आई है। लेकिन चाइना की पॉलिथीन अब भी बिक रही है।
बाजार में 70 फीसदी से अधिक चाइना पॉलिथीन का कारोबार हो रहा है। सस्ता होने के साथ मजबूती के चलते इसकी डिमांड है। कुटीर उद्योग से जुड़े रोहित राज, श्याम नारायण केसरवानी व मोहित ने शासन-प्रशासन के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। इससे काफी हद तक बेरोजगारी दूर होगी।
आयोजनों में दिखने लगे दोना-पत्तल
पॉलिथीन पर रोक का असर दिखने लगा है। जागरूकता का असर है कि कुछ आयोजनों में लकड़ी के चम्मच, दोना, पत्तल नजर आने लगे हैं। कागज के लिफाफे, कुल्हड़, दोना-पत्तल, कागज के कप व ग्लास के उत्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद है।
पॉलिथीन मुक्त वाराणसी के लिए 15 से चलेगा व्यापक अभियान
पॉलिथीन मुक्त काशी की मुहिम में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए 15 जुलाई से व्यापक अभियान चलाया जाएगा। वाराणसी विकास समिति की ओर से गुरुवार को नदेसर में हुई बैठक में मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने यह जानकारी दी।
साथ ही, इस मौके पर शहर के धर्माचार्यों और प्रबुद्धजनों पॉलिथीन का इस्तेमाल न करने की शपथ ली। साथ ही, कपड़े के थैलों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। पॉलिथीन मुक्त काशी के लिए हर स्तर पर सहयोग की बात कही।
अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी धर्माचार्यों, प्रबुद्धजनों और प्रशासनिक अधिकारियों ने संकल्प लिया कि वे किसी भी रूप में पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। वाराणसी विकास समन्वय समिति के चेयरमैन कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने कहा कि शहरवासियों के सहयोग से ही काशी पॉलिथीन मुक्त होगी।
मुफ़्ती ए बनारस मौलाना अब्दुल बातिन ने कहा कि रोजाना सभी मस्जिदों से पॉलिथीन का प्रयोग न करने की अपील की जाएगी। साथ ही, इसके नुकसान बताए जाएंगे। गुरुद्वारा नीचीबाग के भाई धारवीर सिंह ने कहा कि गुरुद्वारों में पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं होता।
समिति के संरक्षक वीरेंद्र कुमार गुप्त ने कहा पॉलिथीन मुक्त काशी हम सभी की जिम्मेदारी है। सबसे पहले हमें खुद पॉलिथीन का इस्तेमाल बंद करना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप शुक्ला ने कहा कि पॉलिथीन के दुष्परिणामों से आम जनता को अवगत कराया जाए और उन्हें जागरूक किया जाए कि इसका इस्तेमाल न करें।
नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने पॉलिथीन मुक्त काशी में सभी से सहयोग का आग्रह किया। ऑटोमोबाइल यूनियन के यूआर सिंह ने दस हजार स्टिकर छपवाकर थ्री व्हीलर पर लगवाने की घोषणा की। ट्रैफिक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने पान विक्रेताओं को ठोंगे में पान देने का सुझाव दिया। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर ने महिलाओं को इसके दुष्परिणाम बताने और उनको जागरूक करने की सलाह दी।