{"_id":"5dbfb8b58ebc3e93bb4c83f8","slug":"slogans-of-pakistan-zindabad-chanted-during-procession-in-azamgarh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पुलिस ने पाक के पक्ष में नारे लगाने पर लिखवाया मुकदमा, जांच में गलत निकले तथ्य, चार लाइन हाजिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुलिस ने पाक के पक्ष में नारे लगाने पर लिखवाया मुकदमा, जांच में गलत निकले तथ्य, चार लाइन हाजिर
Mon, 04 Nov 2019 09:19 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 04 Nov 2019 09:19 PM IST
विज्ञापन
निजामाबाद के शिवली में कदीम जुलूस अमारी निकालते शिया समुदाय के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या विवाद पर प्रतीक्षित फैसले के मद्देनजर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के चक्कर में पुलिस की जल्दबाजी किरकिरी का कारण भी बन रही है। इसका नमूना शिवली गांव में देखने को मिला, जहां जुलूस के दौरान पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने की बात कह कर रविवार रात पुलिस ने निजामाबाद थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं तो सीओ सदर और एलआईयू ने जांच की। जांच में मामला गलत निकला। लाउडस्पीकर की तकनीकी खामी की बात कहकर मुकदमा दर्ज कराने वाले चौकी प्रभारी राशिदगंज और तीन सिपाही लाइन हाजिर कर दिए गए। निजामाबाद थाने के शिवली गांव में रविवार को जुलूस-ए-अमारी निकाला गया था।
इसमें लाउडस्पीकर से नारे लगाए जा रहे थे। रात में चौकी प्रभारी राशिदगंज कमलाशंकर गिरी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि जुलूस जैसे ही यूबीआई के पास पहुंचा तो लोग देशविरोधी और पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने लगे। पुलिस ने विरोध किया तो लोग शांत हो गए। मुकदमे में शिवली गांव निवासी जफर अब्बास और सैयद कमर अब्बास को आरोपी बनाया गया।
विज्ञापन
इंस्पेक्टर दिनेश सिंह ने बताया कि उन्होंने भी नारेबाजी सुनी थी। रात 10:21 बजे घटना की रिपोर्ट दर्ज की गई। सीओ सदर मो. अकमल खां और एलआईयू के कर्मचारियों ने जांच की तो सामने आया कि लाउडस्पीकर की तकनीकी खामी की वजह से पुलिसकर्मियों ने हुसैनियत के बदले पाकिस्तान और यजीदियत के बदले हिंदुस्तान सुन लिया थी।
गलतफहमी हुई कि जुलूस में देश विरोधी नारे लग रहे थे। एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि जांच के बाद गलत केस दर्ज कराने वाले दरोगा कमलाशंकर गिरी और चौकी के सिपाही अवधेश प्रसाद, अभिमन्यु व प्रवीण कुमार को लाइन हाजिर किया गया है। मुकदमा स्पंज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
विज्ञापन
इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं तो सीओ सदर और एलआईयू ने जांच की। जांच में मामला गलत निकला। लाउडस्पीकर की तकनीकी खामी की बात कहकर मुकदमा दर्ज कराने वाले चौकी प्रभारी राशिदगंज और तीन सिपाही लाइन हाजिर कर दिए गए। निजामाबाद थाने के शिवली गांव में रविवार को जुलूस-ए-अमारी निकाला गया था।
विज्ञापन
इसमें लाउडस्पीकर से नारे लगाए जा रहे थे। रात में चौकी प्रभारी राशिदगंज कमलाशंकर गिरी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि जुलूस जैसे ही यूबीआई के पास पहुंचा तो लोग देशविरोधी और पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने लगे। पुलिस ने विरोध किया तो लोग शांत हो गए। मुकदमे में शिवली गांव निवासी जफर अब्बास और सैयद कमर अब्बास को आरोपी बनाया गया।
विज्ञापन
इंस्पेक्टर दिनेश सिंह ने बताया कि उन्होंने भी नारेबाजी सुनी थी। रात 10:21 बजे घटना की रिपोर्ट दर्ज की गई। सीओ सदर मो. अकमल खां और एलआईयू के कर्मचारियों ने जांच की तो सामने आया कि लाउडस्पीकर की तकनीकी खामी की वजह से पुलिसकर्मियों ने हुसैनियत के बदले पाकिस्तान और यजीदियत के बदले हिंदुस्तान सुन लिया थी।
गलतफहमी हुई कि जुलूस में देश विरोधी नारे लग रहे थे। एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि जांच के बाद गलत केस दर्ज कराने वाले दरोगा कमलाशंकर गिरी और चौकी के सिपाही अवधेश प्रसाद, अभिमन्यु व प्रवीण कुमार को लाइन हाजिर किया गया है। मुकदमा स्पंज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
आयोजकों की वीडियो रिकार्डिंग से स्पष्ट हुआ मामला
सीओ सदर मो. अकमल खां ने बताया कि शिवली गांव में होने वाले कार्यक्रम के आयोजक ने सुबह आठ बजे से शाम साढ़े छह बजे तक की अनुमति ली थी। पुलिस की तरफ से वीडियोग्राफी कराने की व्यवस्था नहीं थी। हालांकि आयोजक मंडल ने रिकार्डिंग कराई थी।
पूरी रिकार्डिंग सुनने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि जुलूस में जिस लाउडस्पीकर का प्रयोग हो रहा था, उसमें तकनीकी खामियां थी। इस वजह से पुलिस वालों ने गलत सुन लिया था। अब ये समझ से परे है कि मुकदमा दर्ज करने से पहले रिकार्डिंग क्यों नहीं सुनी गई। आमतौर पर ऐसे जुलूस की रिकार्डिंग के निर्देश होते हैं, लेकिन पुलिस से चूक क्यों हुई यह समझ से परे है।
एडीजी जोन बृज भूषण का कहना है कि एसपी आजमगढ़ को कहा गया है कि पूरे प्रकरण को वह खुद देखें। वीडियो रिकार्डिंग में यदि देश विरोधी बातें सुनाईं दें तो नारे लगाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। यदि जुलूस में शामिल लोगों की बात पुलिस ने गलत तरीके से सुन कर मुकदमा दर्ज कराया है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए।
पूरी रिकार्डिंग सुनने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि जुलूस में जिस लाउडस्पीकर का प्रयोग हो रहा था, उसमें तकनीकी खामियां थी। इस वजह से पुलिस वालों ने गलत सुन लिया था। अब ये समझ से परे है कि मुकदमा दर्ज करने से पहले रिकार्डिंग क्यों नहीं सुनी गई। आमतौर पर ऐसे जुलूस की रिकार्डिंग के निर्देश होते हैं, लेकिन पुलिस से चूक क्यों हुई यह समझ से परे है।
एडीजी जोन बृज भूषण का कहना है कि एसपी आजमगढ़ को कहा गया है कि पूरे प्रकरण को वह खुद देखें। वीडियो रिकार्डिंग में यदि देश विरोधी बातें सुनाईं दें तो नारे लगाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। यदि जुलूस में शामिल लोगों की बात पुलिस ने गलत तरीके से सुन कर मुकदमा दर्ज कराया है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए।