जानें कौन हैं कबड्डी के शो मैन: गए थे सेना की तैयारी करने, SAI ने बदल दी जिंदगी; लीग के 10 सीजन खेल चुके हैं
बिजनौर के रहने वाले राहुल चाैधरी को कबड्डी का बेहतरीन खिलाड़ी कहा जाता है। वे प्रो कबड्डी लीग के लगातार 10 सीजन खेलने में कामयाब रहे और सात सीजन में बेस्ट खिलाड़ी रहे।
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सेना की तैयारी के लिए दौड़ लगाने गया था। वहां भारतीय खेल प्राधिकरण की ओर से लगे चयन कैंप में ट्रायल देने पर गांधी नगर सेंटर के लिए चयन हो गया। राष्ट्रीय खेल में यूपी को 2015 में पहला स्वर्ण पदक दिलाया।
यह बातें राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी राहुल चौधरी ने बातचीत के दौरान कहीं। बिजनौर के जलालपुर निवासी राहुल चौधरी इस समय वाराणसी के लालपुर में यूपी टीम के शिविर का हिस्सा हैं। सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता 20 से 23 तक फरवरी तक ओडिसा में होगी। कोच अर्जुन और कुलदीप की निगरानी में शिविर लगा है।
उन्होंने बताया कि प्रो कबड्डी लीग के लगातार 10 सीजन खेलने में कामयाब रहे और सात सीजन में बेस्ट खिलाड़ी रहे। पिता होमगार्ड की नौकरी करते थे। घर की माली हालत भी ठीक नहीं थी। सेना में चयनित होकर देशसेवा करना चाहता था। गांव में सभी दौड़ लगाते थे।
मैदान पर मैं भी गया और वहां भारतीय खेल प्राधिकरण की ओर से साई सेंटर के लिए कबड्डी खिलाड़ियों के चयन के लिए टीम आई थी। 2010 में दसवीं कक्षा में पढ़ता था दौड़ के दौरान ट्रायल दिया और साई के गुजरात के गांधीनगर सेंटर के लिए चयन हो गया। कोच जयवीर शर्मा की देखरेख में मुझे काॅर्नर पोजीशन से खेलने का मौका मिला। वह दोनों काॅर्नर से खेलते थे।
चाचा से 1200 रुपये लेकर पहुंचे गांधी नगर
साई सेंटर गांधी नगर जाने के लिए पैसे नहीं थे। चाचा से 1200 रुपये लेकर बिजनौर से गांधी नगर गया। जनरल टिकट लेकर मुजफ्फर नगर से ट्रेन में सवार हुआ। भीड़ होने के कारण सीट पर जगह नहीं मिली तो दो बोगियों के बीच बैठ गया। डर के मारे रातभर नींद नहीं आई। साई सेंटर पहुंचकर 1000 रुपये बतौर काॅशन मनी जमा कराए तब से खेलने का सफर शुरू हुआ।
2012 में यूपी टीम में मिली जगह
राहुल चौधरी ने बताया कि 2012 में यूपी टीम में चयनित हुआ। इसकी राष्ट्रीय प्रतियोगिता फैजाबाद में खेली गई। प्रदर्शन के आधार पर वहां से नॉर्थ जोन हरिद्वार के लिए खेला। इसमें उत्तराखंड के खिलाफ हुए फाइनल में मुझे अंतिम पांच मिनट के लिए खेलने का मौका मिला। उस समय टीम हार रही थी।
मैन पहली रेड में तीन अंक लेकर टीम को जीत दिलाई। इसके बावजूद भी मुझे मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय मुकाबले में टीम में शामिल होने के बाद भी मैच में नहीं खिलाया गया। इसके बाद 2013 में मुझे राष्ट्रीय टीम में मुख्य रेडर के तौर पर खेलने का मौका मिला। दक्षिण भारत में मुकाबला हुआ और टीम को तीसरा स्थान मिला। 2015 में यूपी टीम में बतौर कप्तान खेला और टीम को स्वर्ण जिताया। 2014 से लगातार दस सीजन तक बेस्ट रेडर रहा।
पढ़ाई से लगता था डर
घर में बड़े भाई और पिता खेलने पर डांटते और पढ़ाई करने के लिए कहते थे, लेकिन मेरा पढ़ने में मन नहीं लगता था। कभी दौड़ कभी क्रिकेट भी खेला करता था। साई में कठिन प्रशिक्षण से घर भागने का मन करता था लेकिन पढ़ाई और घर की डांट से मैं गांधी नगर साई सेंटर में रहा।