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आसरे के इंतजार में एक मां...
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 06 Apr 2016 02:33 AM IST
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परिस्थितियां कुछ ऐसी बदलीं कि कुछ ही वर्षों में नाटी इमली की रहने वाली गायत्री देवी का सब कुछ उजड़ गया। पति और बेटे दुनिया में नहीं रहे। तंगी में मकान बिक गया। बेटी -दामाद ने मुंबई में एक साल साथ रखने के बाद वाराणसी भेज दिया। कुछ दिनों तक तो दूसरों के घरों में बर्तन धोकर गायत्री ने गुजारा किया। अब वह काम भी छूट गया। पैसे न चुकाने पर मकान मालिक ने भी निकाल दिया। वह पिछले एक महीनेे से नाटी इमली में पानी की टंकी के नीचे दिन गुजार रही हैं।
क्षेत्रीय लोगों ने प्रोबेशन विभाग को इसकी जानकारी दी मगर फिर भी गायत्री को आसरा नहीं मिला। करीब 65 वर्षीय गायत्री का कभी नाटी इमली में खुद का मकान था। बीस साल पूर्व उनके पति की बीमारी से मौत हो गई। इसके कुछ दिनों बाद बेटे की मौत हो गई। बेटी की शादी मुंबई में हुई थी। आर्थिक तंगी की वजह से मकान बेचना पड़ा। करीब एक साल पहले बेटी उन्हें अपने साथ मुंबई ले गई। कुछ दिनों पूर्व उसने मां को वापस वाराणसी भेज दिया। हालांकि गायत्री बेटी का कोई दोष नहीं देती। उनका कहना है कि वह खुद ही चली आईं।
उन्होंने फिर एक घर में बर्तन धोनेे का काम शुरू कर दिया। किराया न देने पर मकान मालिक ने भी निकाल दिया। हालांकि मकान मालिक का कहना है कि घर की मरम्मत कराने के लिए मकान खाली कराया है। पिछले एक महीने गायत्री नाटी इमली में दिन गुजार रही है। मोहल्ले के ही कुछ लोग उन्हें खाना पहुंचा जाते हैं। उधर, जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात रंजन ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
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क्षेत्रीय लोगों ने प्रोबेशन विभाग को इसकी जानकारी दी मगर फिर भी गायत्री को आसरा नहीं मिला। करीब 65 वर्षीय गायत्री का कभी नाटी इमली में खुद का मकान था। बीस साल पूर्व उनके पति की बीमारी से मौत हो गई। इसके कुछ दिनों बाद बेटे की मौत हो गई। बेटी की शादी मुंबई में हुई थी। आर्थिक तंगी की वजह से मकान बेचना पड़ा। करीब एक साल पहले बेटी उन्हें अपने साथ मुंबई ले गई। कुछ दिनों पूर्व उसने मां को वापस वाराणसी भेज दिया। हालांकि गायत्री बेटी का कोई दोष नहीं देती। उनका कहना है कि वह खुद ही चली आईं।
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उन्होंने फिर एक घर में बर्तन धोनेे का काम शुरू कर दिया। किराया न देने पर मकान मालिक ने भी निकाल दिया। हालांकि मकान मालिक का कहना है कि घर की मरम्मत कराने के लिए मकान खाली कराया है। पिछले एक महीने गायत्री नाटी इमली में दिन गुजार रही है। मोहल्ले के ही कुछ लोग उन्हें खाना पहुंचा जाते हैं। उधर, जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात रंजन ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
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