घर में घुस जाऊं मगर खौफ है पिट जाने का... जैसे शेर कहने वाले कम्बख्त जौनपुरी का निधन
हिंदी-उर्दू अदब पर गहरी छाप छोड़ने वाले वरिष्ठ शायर कम्बख्त जौनपुरी का बुधवार की शाम निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके पैतृक गांव जौनपुर जिले के करंजाकला विकास खंड के उत्तरपट्टी स्थित कब्रिस्तान में गुरुवार को शव दफन कर दिया गया। उनके जनाजे में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
कम्बख्त जौनपुरी की पहचान नेक दिल, उदारवादी इंसान के रूप में है। हिंदी और उर्दू अदब पर उनकी गहरी छाप थी। उनके निधन से साहित्यकारों में शोक की लहर दौड़ गई।
साहित्यिक संस्था कोशिश से उनका गहरा लगाव था। उनकी रचनाओं में गांव, शहर, परिवार, ज्ञान विज्ञान, शिक्षा, खेती-बाड़ी, कौमी एकता के अलावा कुरीतियों पर प्रहार देखने को मिलता है।
उनके शेर पर सभागार में ठहाके लगते थे। उनका शेर- जिनकी गर्दन पर है खून मजलूम का, जानते सब हैं पहचानता कौन है और आशिकी पर उनके शेर - घर में घुस जाऊं मगर खौफ है पिट जाने का, उनकी अम्मा है पहलवान बड़ी मुश्किल है, को लोगों ने काफी सराहा है। शिक्षा जगत में व्याप्त कुरीतियों पर उन्होंने -नाली बनाने के लिए बीटेक चाहिए, कानून बनाने के लिए अंगूठा टेक चाहिए... से प्रहार किया है।