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‘रविदास नगर’ पहुंचे संत निरंजन दास
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
Updated Thu, 09 Feb 2017 02:10 AM IST
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वाराणसी पहुंचने पर संत निरंजन दास का भव्य स्वागत हुआ।
- फोटो : Varanasi, Sant Niranjan Dass, grand reception on arrival.
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संत रविदास के गगनभेदी जयकारों के बीच बुधवार की रात लगभग सवा आठ बजे डेढ़ हजार से अधिक रविदासियों को लेकर पंजाब से चली विशेष ट्रेन ‘बेगमपुरा’ वाराणसी पहुंची। डेरा सच्चखंड बल्लां के गद्दीनशीन संत निरंजन दास की अगुवाई में अनुयायियों का जत्था कैंट रेलवे स्टेशन पर उतरा तो स्वागत में ढोल-नगाड़े गूंज उठे। दर्शन के लिए उमड़े सैकड़ों भक्तों ने पुष्प वर्षा कर संत निरंजन दास का भव्य स्वागत किया।
जबरदस्त भीड़ के चलते धक्कामुक्की जैसे हालात नजर आए। स्थिति संभालने में जीआरपी, आरपीएफ के साथ-साथ पंजाब पुलिस और सेवादारों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। कैंट स्टेशन से सीर गोवर्धन स्थित संत रविदास मंदिर तक के रास्ते में भी जगह-जगह संत निरंजन दास के काफिले पर फूल बरसाए गए।
श्रद्धालुओं को लेकर आई विशेष ट्रेन बेगमपुरा एक्सप्रेस सुबह 11 बजे के बजाए लगभग नौ घंटे देरी से वाराणसी पहुंची। 24 बोगियों वाली ट्रेन के प्लेटफार्म नंबर आठ पर पहुंचते ही जयकारे गूंजने लगे। संत निरंजन दास एस-11 कोच में सवार थे। सिविल और रेलवे पुलिस के साथ सेवादारों के घेरे में वह ट्रेन से बाहर आए। संत के दर्शन और उनके फोटो लेने के लिए महिलाओं और पुरुषों की भीड़ से प्लेटफार्म ठसाठस भरा था।
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संत को प्लेटफार्म पर लगी स्वचालित सीढ़ी से सर्कु लेटिंग एरिया में ले आया गया। वहां एक छोटी सी सभा हुई। संत निरंजन दास और उनके साथ आए सभी श्रद्धालुओं का स्वागत हुआ। साथ ही, विश्व शांति, एकता, अखंडता के लिए प्रभु से कामना की गई। फिर यहां से संत का काफिला कड़ी सुरक्षा निगरानी में सीरगोवर्धन रवाना हुआ। भक्तों को रविदास मंदिर ले जाने के लिए बड़ी संख्या में निजी बसें लगाई गई थीं।
सीर गोवर्धन के साथ ही वाराणसी के विभिन्न होटलों में भी रविदासियों को ठहराया गया है। कैंट पर स्वागत करने वालों में निरंजन चीमा, केएल सलवा, जीआर गिरजी, ओपी मेमी आदि प्रमुख रहे। संत रविदास की जयंती मनाने के बाद श्रद्धालुओं का जत्था 11 फरवरी को विशेष ट्रेन से वापस पंजाब लौटेगा।
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जबरदस्त भीड़ के चलते धक्कामुक्की जैसे हालात नजर आए। स्थिति संभालने में जीआरपी, आरपीएफ के साथ-साथ पंजाब पुलिस और सेवादारों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। कैंट स्टेशन से सीर गोवर्धन स्थित संत रविदास मंदिर तक के रास्ते में भी जगह-जगह संत निरंजन दास के काफिले पर फूल बरसाए गए।
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श्रद्धालुओं को लेकर आई विशेष ट्रेन बेगमपुरा एक्सप्रेस सुबह 11 बजे के बजाए लगभग नौ घंटे देरी से वाराणसी पहुंची। 24 बोगियों वाली ट्रेन के प्लेटफार्म नंबर आठ पर पहुंचते ही जयकारे गूंजने लगे। संत निरंजन दास एस-11 कोच में सवार थे। सिविल और रेलवे पुलिस के साथ सेवादारों के घेरे में वह ट्रेन से बाहर आए। संत के दर्शन और उनके फोटो लेने के लिए महिलाओं और पुरुषों की भीड़ से प्लेटफार्म ठसाठस भरा था।
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संत को प्लेटफार्म पर लगी स्वचालित सीढ़ी से सर्कु लेटिंग एरिया में ले आया गया। वहां एक छोटी सी सभा हुई। संत निरंजन दास और उनके साथ आए सभी श्रद्धालुओं का स्वागत हुआ। साथ ही, विश्व शांति, एकता, अखंडता के लिए प्रभु से कामना की गई। फिर यहां से संत का काफिला कड़ी सुरक्षा निगरानी में सीरगोवर्धन रवाना हुआ। भक्तों को रविदास मंदिर ले जाने के लिए बड़ी संख्या में निजी बसें लगाई गई थीं।
सीर गोवर्धन के साथ ही वाराणसी के विभिन्न होटलों में भी रविदासियों को ठहराया गया है। कैंट पर स्वागत करने वालों में निरंजन चीमा, केएल सलवा, जीआर गिरजी, ओपी मेमी आदि प्रमुख रहे। संत रविदास की जयंती मनाने के बाद श्रद्धालुओं का जत्था 11 फरवरी को विशेष ट्रेन से वापस पंजाब लौटेगा।