Varanasi News: हनुमत प्रभु की अंगनाई में उतरी काशी की संस्कृति, मंदिर, घाट व विश्वविद्यालय की झलक ने मोहा
Varanasi News: कला वीथिका परिसर में हनुमान जी पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में विश्वविद्यालयों और कॉलेज के 200 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। शिवम कुमार सेठ अव्वल रहे। जबकि नीरज यादव और सुमन सिंह क्रमश: द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहे। इसके अलावा पांच युवाओं को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
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संकटमोचन संगीत समारोह का एक अहम हिस्सा बन चुके कला वीथिका में कैनवास पर कलाकारों ने एक ऐसी भी पेंटिंग बनाई है जो काशी की संस्कृति की झलक का एहसास करा रही थी। 15 कलाकारों ने 50 घंटे में कैनवास पर हर क्षेत्र के कलाकारों, शिक्षाविदों और काशी की संस्कृतियों को आकार दिया।
संगीत समारोह के पहले दिन से ही काशी की संस्कृतियों को एकाकार करने की परिकल्पना को साकार करने में बीएचयू और काशी विद्यापीठ के फाइन आर्ट्स के छात्र जुटे रहे। डॉ. वीएन मिश्र के संयोजन में वरिष्ठ चित्रकार सुनील विश्वकर्मा और अनिल शर्मा की देखरेख में एक्रेलिक पेंटिंग के जरिये कैनवास पर भावों को उकेरा गया। हर रोज सात से नौ घंटे तक कलाकारों ने अपनी कलाकारी के रंग दिखाए।
डॉ. बीएन मिश्र ने बताया कि कैनवास पर संगीतज्ञों, चित्रकारों, साहित्यकारों के अलावा मंदिर, घाट सहित सभी विश्वविद्यालयों आदि को उकेरा गया है। शहर के पुराने अखबारों को भी स्थान दिया गया है। उन्होंने बताया कि श्रीराम व हनुमान जी के अलावा रामनगर की रामलीला सहित विविध तरह की कलाकृतियों सहित 300 सौ अधिक पेंटिंग व छायाचित्र लगाए गए थे।
कैनवास पर उकेरी इनकी छवि
विभूति नारायण सिंह, उस्ताद बिस्मिल्लह खां, पं. रविशंकर, मदन मोहन मालवीय, पं. शिव प्रसाद गुप्त, पं. किशन महाराज, गिरीजा देवी, राजन मिश्रा, रामकृष्ण दास, रामकुमार, जेएम अहिवासी, राशिद खां, रामछाटपार, वलबीर, एम राजू कुमार, धर्मसम्राट करपात्री महाराज, पं. अमरनाथ मिश्र, प्रो. बीरभद्र मिश्र, रामहर्ष सिंह, पं. माधव, जयशंकर प्रसाद, केएन उडुप्पा, कल्लू डोम, दिनेशचंद्र सेठ आदि के अलावा कैंट स्टेशन, राजघाट का पुल, बीएचयू, काशी विद्यापीठ, संस्कृत विश्वविद्यालय, डीएलडब्ल्यू, पहला रेल, विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन, कालभैरव, मणिकर्णिका घाट, रामनगर किला, गोदौलिया चौराहा आदि को एक साथ बनाया गया।
एक लाख में बिकी श्रीरामलला की पेंटिंग
कला वीथिका में श्रीरामलला की पेंटिंग एक लाख रुपये में बिकी। पहली बार यहां पर एक पेंटिंग का इतना दाम मिला है। बीएचयू भारत कला भवन से सेवानिवृत्त हो चुके काशी के ही वरिष्ठ चित्रकार व डॉ. राधाकृष्ण गणेशन ने दो दिन में कागज पर अयोध्या में स्थापित श्रीरामलला को ऑयल पेस्टल और पेंसिल से बनाया था। प्रभु श्रीरामलला आकर्षक छवि देख सभी मुग्ध थे। गुरुवार को एक इंटरटेनमेंट संस्था की संस्थापिका हर्षिता पाठक ने इस खूबसूरत पेंटिंग को एक लाख में खरीदा।