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संघ भवन मामला: BHU ने प्रतिवादी सूची से कुलपति का नाम हटाने के लिए दिया आवेदन, अगले वर्ष होगी सुनवाई

Tue, 16 Dec 2025 06:19 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Tue, 16 Dec 2025 06:19 AM IST
सार

Varanasi News: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में संघ भवन का मामला एक बार फिर चर्चा में हैं। वर्ष 1937-38 में संघ भवन का निर्माण हुआ था। देश में इमरजेंसी के दौरान बीएचयू में स्थापित आरएसएस भवन को गिरा दिया गया था। 

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Sangh Bhavan case BHU filed an application to remove Vice-Chancellor name from list of respondents
BHU - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू के संघ भवन मामले में विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने सोमवार को कुलपति का नाम प्रतिवादी की सूची से हटाने का आवेदन दिया है। साथ ही 4 दिसंबर को दिए गए आदेश को वापस लेने के लिए भी आवेदन दायर किया गया। अब इस मामले में अगली सुनवाई अगले साल 28 जनवरी को होगी। वहीं, बीएचयू वाणिज्य संकाय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अवधेश सिंह ने भी 30 पेज का प्रार्थना पत्र दाखिल कर केस को खारिज करने की मांग की है।

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सोमवार को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) शमाली मित्तल की अदालत में वाद संख्या 1749/2025 (प्रमील पांडेय बनाम बीएचयू व अन्य) मामले में सुनवाई हुई। इसमें बीएचयू के अधिवक्ता ने विश्वविद्यालय के अधिनियमों का हवाला देते हुए प्रतिवादियों की सूची से कुलपति का नाम हटाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया।
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कुलपति के स्थान पर कुलसचिव को प्रतिवादी बनाए जाने का प्रावधान है। वहीं वाणिज्य संकाय के डॉ. अवधेश सिंह ने प्रार्थना पत्र दाखिल कर कहा कि प्रमील पांडेय के वाद में छात्रसंघ के गठन की बात सही है, लेकिन बाकी तथ्य सिर्फ आरोप हैं। इनमें किसी विशिष्ट घटना का उल्लेख नहीं है। ऐसे में इस केस को खारिज किया जाए।

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वर्ष 1937-38 में हुआ था संघ भवन का निर्माण
वादी, सुंदरपुर स्थित कौशलेश नगर कॉलोनी निवासी प्रमील पांडेय का आरोप है कि इमरजेंसी के दौरान बीएचयू में स्थापित आरएसएस भवन को गिरा दिया गया था। इसे फिर से संचालित करने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। बीएचयू में वर्ष 1931 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा शुरू हुई। इसके बाद वर्ष 1937-38 में दो कमरों का एक संघ भवन भी बनवाया गया था। यह भवन उस समय के प्रति कुलपति राजा ज्वाला प्रसाद के माध्यम से निर्मित कराया गया था।

बीएचयू ने संघ भवन केस को खारिज करने के लिए दिया प्रार्थना पत्र
बीएचयू के संघ भवन मामले में सोमवार को बीएचयू ने न्यायालय में रिकॉल आवेदन दाखिल किया। अब अगली सुनवाई अगले साल 28 जनवरी को होगी। वहीं इस मामले में बीएचयू वाणिज्य संकाय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अवधेश सिंह ने भी 30 पेज का प्रार्थना पत्र दाखिल कर केस को खारिज करने की मांग की है।

इस मामले में सोमवार को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में सुनवाई हुई। इसमें बीएचयू ने पहली बार रिकॉल आवेदन देकर जवाब देने के लिए समय मांगा है। वहीं वाणिज्य संकाय के डॉ. अवधेश सिंह ने प्रार्थना पत्र दाखिल कर कहा है कि प्रमील पांडेय के वाद में छात्रसंघ के गठन की बात सही है लेकिन बाकी तथ्य सिर्फ आरोप हैं। इनमें किसी विशिष्ट घटना का उल्लेख नहीं है। ऐसे में इस केस को खारिज किया जाए।

वर्ष 1937-38 में हुआ था संघ भवन का निर्माण
वादी, सुंदरपुर स्थित कौशलेश नगर कॉलोनी निवासी प्रमील पांडेय का आरोप है कि इमरजेंसी के दौरान बीएचयू में स्थापित आरएसएस भवन को गिरा दिया गया था। इसे फिर से संचालित करने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। बीएचयू में वर्ष 1931 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा शुरू हुई। फिर वर्ष 1937-38 में दो कमरों का एक संघ भवन भी बनवाया गया था। यह भवन उस समय के प्रति कुलपति राजा ज्वाला प्रसाद के माध्यम से निर्मित कराया गया था।

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