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रिहंद डैम पर सौर ऊर्जा परियोजना जल्द
टीम डिजिटल,वाराणसी / सोनभद्र
Updated Sat, 31 Dec 2016 10:00 PM IST
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सोलर प्लांट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पन बिजली उत्पादन के बाद रिहंद और ओबरा डैम पर जल्द ही सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित की जाएगी। परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल पाए जाने के बाद सोलर कारपोरेशन लिमिटेड आफ इंडिया ने परियोजना को हरी झंडी दे दी है। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से काम शुरू होने की उम्मीद है।
5448 वर्ग किलोमीटर एरिया वाले रिहंद डैम पर तीन सौ मेगावाट की पन बिजली परियोजना बांध के निर्माण के समय से ही स्थापित है। चूंकि इसके कैचमेंट एरिया के तटवर्ती क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी और मानव जनित गतिविधियों से अछूता है।
इस कारण केंद्र सरकार की तरफ से डैम एरिया के बड़े हिस्से में पांच सौ मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसी तरह ओबरा डैम का भी आगे वाला हिस्सा इसके लिए मुफीद है।
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सोलर कारपोरेशन लिमिटेड के प्रस्ताव पर चार माह पूर्व राज्य जल विद्युत उत्पादन निगम ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी प्राइस वाटर कूपर हाउस को दी थी। सितंबर के पहले सप्ताह में कूपर हाउस की टीम ने रिहंद और ओबरा बांध का दौरा कर परिस्थितियाें की जांच की थी।
उसी समय सकारात्मक संकेत दे दिए थे। नवंबर अंत में इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट सौंपी गई। अधीक्षण अभियंता विद्युत शैलेष सिंह ने बताया कि रिपोर्ट में सब कुछ ओके बताया गया था।
इसको देखते हुए बड़े बांध पर अपनी तरह के पहले और सूबे के सबसे बड़े रिहंद सोलर पावर प्रोजेक्ट के साथ ओबरा सोलर प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी दे दी गई है। जिस तरह के संकेत मिले हैं, उससे नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से इसकी स्थापना का काम शुरू हो जाने की उम्मीद है।
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5448 वर्ग किलोमीटर एरिया वाले रिहंद डैम पर तीन सौ मेगावाट की पन बिजली परियोजना बांध के निर्माण के समय से ही स्थापित है। चूंकि इसके कैचमेंट एरिया के तटवर्ती क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी और मानव जनित गतिविधियों से अछूता है।
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इस कारण केंद्र सरकार की तरफ से डैम एरिया के बड़े हिस्से में पांच सौ मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसी तरह ओबरा डैम का भी आगे वाला हिस्सा इसके लिए मुफीद है।
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सोलर कारपोरेशन लिमिटेड के प्रस्ताव पर चार माह पूर्व राज्य जल विद्युत उत्पादन निगम ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी प्राइस वाटर कूपर हाउस को दी थी। सितंबर के पहले सप्ताह में कूपर हाउस की टीम ने रिहंद और ओबरा बांध का दौरा कर परिस्थितियाें की जांच की थी।
उसी समय सकारात्मक संकेत दे दिए थे। नवंबर अंत में इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट सौंपी गई। अधीक्षण अभियंता विद्युत शैलेष सिंह ने बताया कि रिपोर्ट में सब कुछ ओके बताया गया था।
इसको देखते हुए बड़े बांध पर अपनी तरह के पहले और सूबे के सबसे बड़े रिहंद सोलर पावर प्रोजेक्ट के साथ ओबरा सोलर प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी दे दी गई है। जिस तरह के संकेत मिले हैं, उससे नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से इसकी स्थापना का काम शुरू हो जाने की उम्मीद है।