लंबे अवकाश पर गए पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक को चार्ज
पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल लंबे अवकाश पर चले गए हैं। उन्होंने इसके लिए बीमारी का हवाला दिया है। उनकी अनुपस्थिति में कुलसचिव का कार्यभार परीक्षा नियंत्रक व्यास नारायण सिंह को सौंपा गया है। उधर, चर्चाओं का बाजार गर्म है। उनके अवकाश पर जाने को पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम यादव के कार्यकाल में हुई संबद्धता, सुरक्षा और निर्माण कार्यों के लिए बजट आवंटन में गड़बड़ियों से जुड़ी शिकायतों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। फिलहाल इस मामले में विवि के जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है।
विवि में करीब तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल की मूल तैनाती वाणिज्य कर विभाग में है। पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम यादव के कार्यकाल में उन्हें कुलसचिव बनाकर पूर्वांचल विश्वविद्यालय भेजा गया था। कुलपति के कार्यकाल के अंतिम दिनों में दोनों के बीच मतभेद शुरू हो गए थे। उसके बाद कुलसचिव चिकित्सा अवकाश पर चले गए थे। अब फिर से लंबे अवकाश पर चले गए हैं। उन्होंने गले में संक्रमण बताकर छुट्टी मांगी है।
बताया जा रहा है कि रविवार को एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जिले में आए उप मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के सामने कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कुलसचिव की अनुपस्थिति से होने वाली दिक्कतों के बारे में चर्चा की थी। उप मुख्यमंत्री ने कुलसचिव के आने तक परीक्षा नियंत्रक से ही कार्य लेने को कहा था।
सूत्रों का कहना है कि विधान परिषद सदस्य शतरुद्र प्रकाश और सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र त्रिपाठी ने पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम यादव के कार्यकाल के दौरान विवि में संबद्धता, मान्यता देने, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, भवनों के निर्माण ठेके के आवंटन में अनियमितता की शिकायत राजभवन में की थी। इस पर शासन ने कुलपति से 15 दिनों के अंदर आख्या मांगी है। इससे पहले ही कुलसचिव अवकाश पर चले गए हैं। इस संदर्भ में कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य का कहना था कि कुलसचिव अस्वस्थता के कारण अवकाश पर हैं। इससे कामकाज प्रभावित था। फिलहाल परीक्षा नियंत्रक को उनका कार्यभार सौंपा गया है। उन्होंने अन्य आरोपों की बाबत कुछ भी कहने से इंकार किया।
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कुलसचिव के करीबी सूत्रों का कहना है कि उनकी मूल नियुक्ति वाणिज्य कर विभाग में है। कुछ माह पहले ही उनकी पदोन्नति हो चुकी है। लिहाजा वह अपने मूल विभाग में वापस जाना चाहते हैं। इसके लिए करीब एक माह पहले शासन से प्रतिवेदन किया है। वहां से इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है।