एक साल से पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई के संपर्क में था राशिद, मिलिट्री इंटेलिजेंस को मिला था इनपुट
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वाराणसी की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) द्वारा गिरफ्तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का एजेंट राशिद बीते एक साल से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में था। आईएसआई और राशिद के कनेक्शन की जानकारी मिलिट्री इंटेलिजेंस को जुलाई 2019 में मिली थी।
पता लगा था कि वाराणसी में रह रहा एक युवक व्हाट्सएप से गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान भेज रहा है। इस इनपुट के आधार पर मिलिट्री इंटेलिजेंस ने यूपी एटीएस के साथ काम करना शुरू किया। राशिद की तस्दीक करने के बाद 16 जनवरी को उससे पूछताछ शुरू की गई और 19 जनवरी की रात उसे गिरफ्तार किया गया।
राशिद ने बताया कि वह 2017 और 2018-19 में कराची में रहने वाली अपनी मौसी के पास गया था। मौसी के बेटे के माध्यम से उसकी आईएसआई के दो एजेंटों से मुलाकात हुई। वह उसे गोपनीय सूचनाओं के बदले में पैसा, गिफ्ट और शादी कराने का वादा किया था। आखिरी बार 13 जनवरी 2020 को उसकी पाकिस्तानी एजेंट्स से बात हुई थी। जुलाई 2019 में राशिद को पांच हजार रुपये मिले थे। जोधपुर मिलिट्री कैम्प की सूचना देने पर एक लाख रुपये और 15 हजार रुपये महीने का खर्च देने की बात कही गई थी।
सीएए और एनआरसी के विरोध-प्रदर्शन के वीडियो पाकिस्तान भेजे
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के विरोध में बीते दिसंबर महीने में वाराणसी और लखनऊ में प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के वीडियो भी राशिद ने पाकिस्तान भेजे थे। इसे लेकर सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की टीम अलग से पूछताछ कर रही है।
कई संवेदनशील जगहों की तस्वीरें और वीडियो भेजे थे आईएसआई को
गिरफ्तार राशिद अहमद भारतीय व्हाट्सएप नंबर से पाकिस्तानी हैंडलर को कई स्थानों की तस्वीरें और वीडियो साझा किए थे। ये सभी स्थान सुरक्षा के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण हैं। राशिद के मोबाइल से मिली जानकारी के अनुसार उसने काशी विश्वनाथ मंदिर, वायु सेना चयन बोर्ड वाराणसी, ज्ञानवापी मस्जिद, संकटमोचन मंदिर, कैंट रेलवे स्टेशन, दशाश्वमेध घाट, आगरा किला, नबी पुल और अर्धकुंभ मेला (प्रयागराज), सीआरपीएफ कैंप (चंदौली और अमेठी), गोरखपुर रेलवे स्टेशन, रेणुकूट थर्मल पावर प्लांट (सोनभद्र), दिल्ली के इंडिया गेट, अजमेर शरीफ (राजस्थान) और नागपुर रेलवे स्टेशन सहित कई अन्य स्थानों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान भेजा था।