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राज्यपाल राम नाईक बोले, बेटियों की सफलता, महिला सशक्तिकरण का नया युग
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 11 Oct 2017 07:18 PM IST
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राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल राम नाईक ने छात्र-छात्राओं को लक्ष्य निर्धारण, कड़ी मेहनत, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी की सीख दी। कहा कि साल दर साल जिस तरह से सफलता में बेटियां आगे आ रही हैं, वह एक नए युग की शुरूआत जैसा है।
राज्यपाल ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 39वें दीक्षांत समारोह में यह बातें कही। उन्होंने कहा कि इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है उपाधि पाने वाले 99893 विद्यार्थियों में 42575 छात्र और 57380 छात्राएं हैं जबकि मेडल पाने वालों में 14 छात्र, 45 छात्राएं शामिल हैं।
यह गौरव की बात है कि बेटियां सफलता की ओर अग्रसर हैं। इसे महिला सशक्तिकरण का नया युग माना जा सकता है। राज्यपाल ने समारोह में पदक पाने वाली छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को लेकर आंदोलन चल रहा है।
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57 प्रतिशत बेटियों ने जिस तरह से उपाधि प्राप्त की है, इसी को महिला सशक्तिकरण के लिए एक नया युग कहा जा सकता है। यह पहला विश्वविद्यालय है इस साल का दीक्षांत कराने वाला है, जिसमें छात्राओं की संख्या अधिक है।
लड़कियों को अपने पैरों पर प्रतिस्पर्धा के बल पर खड़ा होने का अवसर मिल रहा है, इसके बरकरार रहना होगा। रामनाईक ने कहा कि सेना में कार्यरत महिलाओं को लड़ाकू विमान देना है कि नहीं, आज इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है लेकिन इसी बीच देश की रक्षामंत्री महिला बन गई।
महिलाओं का आगे बढ़ना देश के लिए शुभ संकेत है। केवल डिग्री-सर्टिफिकेट नहीं, गुणवत्ता और ज्ञान पर ध्यान जरूरी है। दीक्षांत में उपाधि पाने के बाद किताबी पढ़ाई भले पूरी हो गई हो लेकिन अब जीवन की लड़ाई शुरू हो गई है।
मेहनत और अनुशासन के दम पर पूरी मजबूती से इस लड़ाई में आगे बढ़ें। उपाधि और मेडल पाने वालों में छात्राओं की संख्या अधिक होने पर खुशी जाहिर की। कहा कि बेटियों की सफलता से नए युग की शुरुआत हुई है।
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राज्यपाल ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 39वें दीक्षांत समारोह में यह बातें कही। उन्होंने कहा कि इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है उपाधि पाने वाले 99893 विद्यार्थियों में 42575 छात्र और 57380 छात्राएं हैं जबकि मेडल पाने वालों में 14 छात्र, 45 छात्राएं शामिल हैं।
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यह गौरव की बात है कि बेटियां सफलता की ओर अग्रसर हैं। इसे महिला सशक्तिकरण का नया युग माना जा सकता है। राज्यपाल ने समारोह में पदक पाने वाली छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को लेकर आंदोलन चल रहा है।
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57 प्रतिशत बेटियों ने जिस तरह से उपाधि प्राप्त की है, इसी को महिला सशक्तिकरण के लिए एक नया युग कहा जा सकता है। यह पहला विश्वविद्यालय है इस साल का दीक्षांत कराने वाला है, जिसमें छात्राओं की संख्या अधिक है।
लड़कियों को अपने पैरों पर प्रतिस्पर्धा के बल पर खड़ा होने का अवसर मिल रहा है, इसके बरकरार रहना होगा। रामनाईक ने कहा कि सेना में कार्यरत महिलाओं को लड़ाकू विमान देना है कि नहीं, आज इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है लेकिन इसी बीच देश की रक्षामंत्री महिला बन गई।
महिलाओं का आगे बढ़ना देश के लिए शुभ संकेत है। केवल डिग्री-सर्टिफिकेट नहीं, गुणवत्ता और ज्ञान पर ध्यान जरूरी है। दीक्षांत में उपाधि पाने के बाद किताबी पढ़ाई भले पूरी हो गई हो लेकिन अब जीवन की लड़ाई शुरू हो गई है।
मेहनत और अनुशासन के दम पर पूरी मजबूती से इस लड़ाई में आगे बढ़ें। उपाधि और मेडल पाने वालों में छात्राओं की संख्या अधिक होने पर खुशी जाहिर की। कहा कि बेटियों की सफलता से नए युग की शुरुआत हुई है।