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मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट में काशी के विद्वान निभाएंगे अहम भूमिका
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महादेव के आराध्य भगवान राम की अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में काशी की अहम भूमिका हो सकती है। काशी विश्वनाथ धाम की परिकल्पना के बाद से मंदिर न्यास के जरिए शासन ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इससे काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ने के साथ ही मंदिर के रख-रखाव आदि की सुगम व्यवस्था बनी है। काशी विश्वनाथ धाम की अहम कड़ी काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की तर्ज पर ही अयोध्या में ट्रस्ट का गठन किया जा सकता है। इसके अलावा काशी के विद्वानों को वहां के न्यास में शामिल किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट को काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की तर्ज पर तैयार किया जा सकता है। इसके लिए शासन ने वरिष्ठ अधिकारियों से न्यास की कार्यशैली पर पूरी रिपोर्ट मांगी है। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास मंदिर में होने वाले कर्मकांड, पूजा पाठ आदि से जुड़े निर्णय करता है। इसके अलावा धार्मिक आयोजन और न्यास की संपत्तियों को विकसित करता है। सूत्रों की मानें तो काशी विश्वनाथ विकास परिषद की तरह ही मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली अयोध्या तीर्थ विकास परिषद का गठन किया जाएगा। शासन से काशी के विद्वानों की सूची भी मांगी गई है। वाराणसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि न्यास की कार्ययोजना के साथ ही काशी के विद्वानों की जानकारी भी शासन को भेजी जाएगी।
पीतल कारीगर कर रहे तैयारी
अयोध्या पर फैसला आने के बाद काशी के रिपोजी (चित्रों को उकेरना) के कारीगर उत्साहित हैं। वे सोने चांदी के पत्तर पर खूबसूरत रिपोजी के लिए तैयार हैं। इसके अलावा पीतल के अखंड दीप, कलश आदि बनाने वाले शिल्पी भी अयोध्या के बुलाने के इंतजार में हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट को काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की तर्ज पर तैयार किया जा सकता है। इसके लिए शासन ने वरिष्ठ अधिकारियों से न्यास की कार्यशैली पर पूरी रिपोर्ट मांगी है। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास मंदिर में होने वाले कर्मकांड, पूजा पाठ आदि से जुड़े निर्णय करता है। इसके अलावा धार्मिक आयोजन और न्यास की संपत्तियों को विकसित करता है। सूत्रों की मानें तो काशी विश्वनाथ विकास परिषद की तरह ही मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली अयोध्या तीर्थ विकास परिषद का गठन किया जाएगा। शासन से काशी के विद्वानों की सूची भी मांगी गई है। वाराणसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि न्यास की कार्ययोजना के साथ ही काशी के विद्वानों की जानकारी भी शासन को भेजी जाएगी।
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पीतल कारीगर कर रहे तैयारी
अयोध्या पर फैसला आने के बाद काशी के रिपोजी (चित्रों को उकेरना) के कारीगर उत्साहित हैं। वे सोने चांदी के पत्तर पर खूबसूरत रिपोजी के लिए तैयार हैं। इसके अलावा पीतल के अखंड दीप, कलश आदि बनाने वाले शिल्पी भी अयोध्या के बुलाने के इंतजार में हैं।
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