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अयोध्या राम मंदिर निर्माण में ना हो कोई बाधा, ब्राह्मणों ने शुरू किया 41 दिवसीय शक्ति अनुष्ठान

Tue, 22 Oct 2019 05:00 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 22 Oct 2019 05:00 PM IST
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ram mandir ayodhya Brahmins conducted Shakti rituals at Durga temple for construction in varanasi
41 दिवसीय शक्ति अनुष्ठान करते ब्राह्मण। - फोटो : अमर उजाला

अयोध्या में होने वाले राम मंदिर के निर्माण में कोई बाधा उत्पन्न हो, इसके लिए वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में मंगलवार दोपहर से ब्राह्मणों ने 41 दिवसीय शक्ति अनुष्ठान का आयोजन किया। अनुष्ठान आचार्य पंडित रमेश महाराज के सानिध्य में शुरू हुआ।

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इस अवसर पर उन्होंने बताया कि राम मंदिर में कोई विघ्न बाधा ना आने पाए इसके लिए आदि शक्ति का शक्ति अनुष्ठान परम आवश्यक है। यह अनुष्ठान नियमित रूप से 41 दिनों तक चलेगा। इसमें वैदिक ब्राह्मणों द्वारा दुर्गा सप्तशती पाठ शतचंडी पाठ सहित विविध हवन होंगे।
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देश के सबसे पुराने व सबसे संवेदनशील अयोध्या विवाद की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में 40वें दिन पूरी हो गई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने छह अगस्त 2019 से विवाद की रोजाना सुनवाई शुरू की थी। 16 अक्टूबर तक कुल 40 दिन में अदालत ने हिंदू व मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनीं।
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सुनवाई पूरी होने के साथ कोर्ट ने सभी पक्षों को अगले तीन दिन में 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' पर लिखित में दलीलें पेश करने का निर्देश दिया है। संविधान पीठ के प्रमुख मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई हैं। उनके अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर उसमें शामिल हैं।

क्या है 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ'
सुप्रीम कोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 142 के दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 151 के तहत दो पक्षों की मांगों के अलावा तीसरे तरह का फैसला देने का अधिकार है। चूंकि अयोध्या मामले में हिंदू पक्ष पूरी जन्मभूमि पर अपना दावा कर रहा है। मुस्लिम पक्ष 1992 के पहले की बाबरी मस्जिद जमीन समेत जस की तस मांग रहा है। इसलिए यदि सुप्रीम कोर्ट तथ्यों, सबूतों व गवाहों के मद्देनजर दोनों पक्षों में से किसी एक के पक्ष में फैसला देने की स्थिति में ना हो तो वह 'मोल्डिंग ऑफ रिलीफ' के तहत दोनों पक्षों की मांग के अलावा तीसरे विकल्प पर विचार कर फैसला दे सकती है।

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