{"_id":"5727b7ed4f1c1b51135cd83d","slug":"rajan-sajan-in-the-morning-ragas-with-the-sankat-mochan","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजन-साजन के रागों के साथ संकट मोचन में हुई सुबह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजन-साजन के रागों के साथ संकट मोचन में हुई सुबह
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 03 May 2016 01:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संकट मोचन संगीत समारोह की आखिरी निशा पं. विश्वमोहन भट्ट की मोहन वीणा से झंकृत हुई तो पद्वभूषण पं. राजन मिश्र और पं. साजन मिश्र के रागों से निखर उठी।राजन -साजन के रागों से पूरब में सूरज की लाली छाई और सूरज भी आसमान में अठखेलियां करने लगा। सुर-लय के बेजोड़ समन्वय सुनने के लिए दिन के आठ बजे तक संकट मोचन के दरबार में संगीत प्रेमियों की भीड़ लगी रही। इसी के साथ छह दिवसीय संकट मोचन संगीत समारोह का समापन हो गया।
रात पौने एक बजे मंच पर आए पं. विश्व मोहन ने राग गावती खमाज थाट में अलाप, जोड़, झाला के बाद विलंबित और द्रुत लय में गतकारी की। इन्होंने गायकी और तंत्रकारी की विभिन्न शैलियों का प्रयोग किया। पहली बार उन्होंने गाया भी और बजाया भी। ओ रे माझी रे... गीत को जब उन्होंने स्वर दियातोलोग झूमने लगे। राजस्थानी माड -केसरिया बालम पधारो म्हारे देश के बाद वंदे मातरम...धुन बजाने के बाद संत तुलसी के भजन औरराघुपति राघव राजाराम ..की धुन बजाकर विदा ली। पं. सलिल भट्ट ने वीणा पर साथ दिया। तबले पर संगत की पं. रामकुमार मिश्र ने।
इनके बाद बनारस घराने की पीढ़ी के कलाकार पं. संजू सहाय ने तीन ताल में तबले पर उंगलियों की थिरकन का जादू चलाया। उठान, आमद, परन, टुकड़े, ठेका, तिहाई, बाट, गत, फर्द के अलावा पुरानी बंदिशों से बनारस बाज की शैली से संगीत प्रेमियों को परिचित कराया। अंत में पं राजन मिश्र-पं. साजन मिश्र की बारी आई। संकट मोचन की आरती के बाद मिश्र बंधुओं ने हर हर महादेव के जयघोष के बीच मंच संभाला। राग भटियार में विलंबित एक ताल की बंदिश-उचटि गई मोरी निंदिया... से शुरुआत की। इसके बाद इसी राग में द्रुत तीन ताल में आयो प्रभात सब मिल गाओ... की उन्होंने गायकी अंग के विविध प्रयोगों के साथ प्रस्तुति दी। इसके बाद द्रुत एक ताल में तराना पेश किया। तबले पर पं. राजेश मिश्र और हारमोनियम पर कान्ता नाथ मिश्र ने संगत की। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कलाकारों को सम्मानित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
रात पौने एक बजे मंच पर आए पं. विश्व मोहन ने राग गावती खमाज थाट में अलाप, जोड़, झाला के बाद विलंबित और द्रुत लय में गतकारी की। इन्होंने गायकी और तंत्रकारी की विभिन्न शैलियों का प्रयोग किया। पहली बार उन्होंने गाया भी और बजाया भी। ओ रे माझी रे... गीत को जब उन्होंने स्वर दियातोलोग झूमने लगे। राजस्थानी माड -केसरिया बालम पधारो म्हारे देश के बाद वंदे मातरम...धुन बजाने के बाद संत तुलसी के भजन औरराघुपति राघव राजाराम ..की धुन बजाकर विदा ली। पं. सलिल भट्ट ने वीणा पर साथ दिया। तबले पर संगत की पं. रामकुमार मिश्र ने।
विज्ञापन
इनके बाद बनारस घराने की पीढ़ी के कलाकार पं. संजू सहाय ने तीन ताल में तबले पर उंगलियों की थिरकन का जादू चलाया। उठान, आमद, परन, टुकड़े, ठेका, तिहाई, बाट, गत, फर्द के अलावा पुरानी बंदिशों से बनारस बाज की शैली से संगीत प्रेमियों को परिचित कराया। अंत में पं राजन मिश्र-पं. साजन मिश्र की बारी आई। संकट मोचन की आरती के बाद मिश्र बंधुओं ने हर हर महादेव के जयघोष के बीच मंच संभाला। राग भटियार में विलंबित एक ताल की बंदिश-उचटि गई मोरी निंदिया... से शुरुआत की। इसके बाद इसी राग में द्रुत तीन ताल में आयो प्रभात सब मिल गाओ... की उन्होंने गायकी अंग के विविध प्रयोगों के साथ प्रस्तुति दी। इसके बाद द्रुत एक ताल में तराना पेश किया। तबले पर पं. राजेश मिश्र और हारमोनियम पर कान्ता नाथ मिश्र ने संगत की। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कलाकारों को सम्मानित किया।
विज्ञापन