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बीएचयू आयुर्वेद संकाय में प्रमुख की नियुक्ति पर सवाल, आयुष मंत्रालय के पत्र पर मचा हड़कंप

Wed, 14 Nov 2018 03:14 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Wed, 14 Nov 2018 03:14 PM IST
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Question raised on  joining of Faculty of Ayurveda
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

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बीएचयू आयुर्वेद संकाय में संकाय प्रमुख पद पर नियुक्ति से जुड़े आयुष मंत्रालय से एक पत्र से हड़कंप मचा हुआ है। इसमें इस पद पर बिना आयुर्वेद योग्यता वालों की तैनाती का हवाला देते हुए नियमों का सीसीआईएम के नियमों का पालन न करने का जिक्र है। कुलपति को भेजे इस पत्र में मंत्रालय की अवर सचिव ने नियमानुसार आयुर्वेदिक योग्यता वाले व्यक्ति को ही संकाय प्रमुख नियुक्त करने को कहा है। 
आयुर्वेद संकाय में प्रमुख पद पर नियुक्ति में नियमों की अनदेखी को लेकर भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद(सीसीआईएम) सहित अन्य जगहों पर की गई थी। इस मामले में पूर्व में भी कई पत्र आ चुके हैं। आयुष मंत्रालय में अवर सचिव शीला तिर्की की ओर से 23 अक्तूबर को कुलपति को भेजे पत्र में 26 दिसंबर 2017 को सीसीआईएम के पत्रों के बारे में बताते हुए कहा गया है कि सेंट्रल काउंसिल आफ इंडियन मेडिसिन एक्ट के तहत की जाए।
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बता दें कि पूर्व में ही सीसीआईएम ने नियमानुसार संकाय प्रमुख की नियुक्ति न होने पर बीएएमएस कोर्स को वापस लेने की चेतावनी दी थी। अब नया पत्र आने के बाद संकाय में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इस बारे में पूछे जाने पर संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय के नियमानुसार संकाय प्रमुख पद पर नियुक्ति हुई हैं। इस पूरे मामले में आयुष मंत्रालय के प्रशासनिक दखल देने का कोई औचित्य नहीं है। विश्वविद्यालय की ओर से जो भी जवाब मांगा जाएगा, वो दिया जाएगा।
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छात्राओं से छेड़थानी मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार 


बीएचयू के जंतु विज्ञान विभाग में बीएससी की छात्राओं पर भद्दे कमेंट करने के मामले में निलंबित चल रहे प्रोफेसर एसके चौबे के मामले में बीस दिन बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आ पाई। जिस तरह से कुलपति ने छात्राओं की शिकायत के बाद प्रोफेसर चौबे को निलंबित करने का निर्णय लिया था, उसके हिसाब से जांच में तेजी नहीं दिख रही है।

कुलपति को दस अक्तूबर को दिए शिकायती पत्र में छात्राओं ने भुवनेश्वर में गए शैक्षणिक टूर के दौरान प्रोफेसर एसके चौबे द्वारा अश्लील हरकत करने के साथ ही विभाग में भी भद्दे कमेंट करने सहित कई और गंभीर आरोप लगाए थे। बता दें कि कुलपति ने 23 अक्तूबर को निलंबित कर दिया और मामले की जांच शुरू हुई। छात्र-छात्राओं, प्रोफेसर चौबे, विभाग के अन्य शिक्षकों का बयान भी दर्ज हो चुका है।
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