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केंद्रीय विश्वविद्यालय बनेंगे गुणवत्ता के केंद्र : जावडेकर
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
Updated Fri, 07 Oct 2016 02:06 AM IST
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केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर का स्वागत करते बीएचयू के कुलपति।
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मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों को गुणवत्ता का केंद्र बनाने के लिए हमें शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना होगा। विश्वविद्यालयों में शोध, शोधपत्रों की गुणवत्ता के साथ ही अंतरविषयी शोध को बढ़ावा देना होगा। छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे खोलने के लिए इन विश्वविद्यालयों में छात्रों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। आईआईटी और आईएमएम में सीटें बढ़ाने की योजना भी तैयार की गई है। जावडेकर गुरुवार को बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि भारत की ख्याति उच्च शिक्षा के बेहतरीन केंद्र रहे नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों के कारण प्राचीन काल से रही है। उस वक्त अगर इंटरनेशनल रैंकिंग होती तो हमारे यही विश्वविद्यालय नंबर वन होते। उस वक्त दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का एक तिहाई योगदान रहा करता था लेकिन इस वक्त हमारी भागीदारी एक से दो प्रतिशत ही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अच्छे विश्वविद्यालयों की बदौलत ही देश तरक्की करता है। कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कल्पना है कि विश्वविद्यालय केवल अध्ययन-अध्यापन का केंद्र न बनें बल्कि आसपास के इलाके को विकसित करने में भी वहां के विद्यार्थी पूरा योगदान करें। इसके लिए ही ‘उन्नत भारत अभियान’ की शुरुआत हुई है। इस तरह के और एक्सटेंशन प्रोग्राम विश्वविद्यालयों में शुरू किए जाएंगे।
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केंद्रीय विश्वविद्यालयों में समान पाठ्यक्रम लागू करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में सुधार की आवश्यकता जरूर है लेकिन हर विश्वविद्यालय को अपना कोर्स तय करने की आजादी है। हम इसे खत्म नहीं करना चाहते। उन्होेंने विश्वविद्यालयों में ‘च्वाइस बेस्ड क्रेडिट’ सिस्टम लागू करने की बात कही। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों पर नियुक्ति के सवाल पर उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल सभी कुलपतियों को निर्देशित किया गया है कि वे जल्द से जल्द सभी रिक्त पदों पर नियुक्तियां करें।
यूजीसी के मुताबिक विश्वविद्यालयों में तकरीबन 30 फीसदी शिक्षकों के पद खाली हैं। उन्होंने बताया कि डिग्रियों का फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नेशनल डिपाजिटरी स्कीम चलाई जा रही है। इसके जरिए विद्यार्थियों की सभी डिग्रियों को डिजिटलाइज्ड करने का काम इस साल शुरू कर दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि भारत की ख्याति उच्च शिक्षा के बेहतरीन केंद्र रहे नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों के कारण प्राचीन काल से रही है। उस वक्त अगर इंटरनेशनल रैंकिंग होती तो हमारे यही विश्वविद्यालय नंबर वन होते। उस वक्त दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का एक तिहाई योगदान रहा करता था लेकिन इस वक्त हमारी भागीदारी एक से दो प्रतिशत ही है।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अच्छे विश्वविद्यालयों की बदौलत ही देश तरक्की करता है। कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कल्पना है कि विश्वविद्यालय केवल अध्ययन-अध्यापन का केंद्र न बनें बल्कि आसपास के इलाके को विकसित करने में भी वहां के विद्यार्थी पूरा योगदान करें। इसके लिए ही ‘उन्नत भारत अभियान’ की शुरुआत हुई है। इस तरह के और एक्सटेंशन प्रोग्राम विश्वविद्यालयों में शुरू किए जाएंगे।
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केंद्रीय विश्वविद्यालयों में समान पाठ्यक्रम लागू करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में सुधार की आवश्यकता जरूर है लेकिन हर विश्वविद्यालय को अपना कोर्स तय करने की आजादी है। हम इसे खत्म नहीं करना चाहते। उन्होेंने विश्वविद्यालयों में ‘च्वाइस बेस्ड क्रेडिट’ सिस्टम लागू करने की बात कही। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों पर नियुक्ति के सवाल पर उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल सभी कुलपतियों को निर्देशित किया गया है कि वे जल्द से जल्द सभी रिक्त पदों पर नियुक्तियां करें।
यूजीसी के मुताबिक विश्वविद्यालयों में तकरीबन 30 फीसदी शिक्षकों के पद खाली हैं। उन्होंने बताया कि डिग्रियों का फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नेशनल डिपाजिटरी स्कीम चलाई जा रही है। इसके जरिए विद्यार्थियों की सभी डिग्रियों को डिजिटलाइज्ड करने का काम इस साल शुरू कर दिया गया है।