UP: काशी की पूर्णिमा चीन में दिखाएंगी हुनर, जूनियर एशिया कप की हॉकी टीम में चयन; क्रिकेट में नहीं मिली कामयाबी
Varanasi News: काशी की पूर्णिमा का चयन जूनियर एशिया कप के लिए भारतीय हॉकी टीम में हुआ है। वह फॉरवर्ड पोजीशन से खेलेंगी। क्रिकेट में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने हॉकी में करियर बनाया और अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची हैं। जूनियर एशिया कप का आयोजन 30 अगस्त से चीन के मोकी स्टेडियम में होगा।
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Junior Asia Cup hockey: हॉकी इंडिया ने बृहस्पतिवार को एशियाई हॉकी महासंघ (एएचएफ) ने जूनियर एशिया कप के लिए जूनियर महिला हॉकी टीम घोषित कर दी है। इसमें हरहुआ के चक्का गांव निवासी पूर्णिमा यादव का चयन हुआ है। पूर्णिमा ने नौ साल की उम्र तक क्रिकेट खेला। क्रिकेट में बेहतर जगह नहीं मिलने पर हरहुआ विवेक सिंह एकेडमी में हॉकी खेलना शुरू किया और इसके बाद लगातार सफलताएं हासिल कीं।
वह 30 अगस्त से 13 सितंबर चीन के मोकी स्टेडियम में जूनियर एशिया कप अंडर 21 टूर्नामेंट में फॉर्वर्ड पोजिशन से खेलेंगी। टूर्नामेंट की तैयारी के के लिए वह यूनाइटेड किंगडम के एक सफल एक्सपोज़र टूर से लौटीं। इस दौरे से खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मैचों का अनुभव से जूनियर एशिया कप से पहले उनकी तैयारी और मजबूत हुई।
इससे पहले भी पूर्णिमा यादव ऑस्ट्रेलियन लीग में खेलने वाली भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर हरहुआ के चक्का गांव की रहने वाली हैं। उनकी मां अमरावती ने कर्ज लेकर उनके लिए हॉकी किट खरीदी थी।
उन्होंने हरहुआ के ओलंपियन विवेक सिंह एकेडमी से हॉकी की शुरुआत की थी। इसके बाद उनका चयन स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर के लिए हो गया। पूर्णिमा के पिता कौशलेंद्र यादव किसान हैं। पूर्णिमा की मां ने बैंक से 1.25 लाख रुपये का ऋण लेकर हॉकी किट देकर गोरखपुर भेजा था। भारतीय जूनियर हॉकी टीम में पूर्णिमा का चयन बतौर फॉर्वर्ड लाइन खिलाड़ी के तौर पर हुआ। फॉर्वर्ड लाइन में पूर्णिमा के अलावा पांच अन्य का चयन हुआ।
ड्रैग फ्लिक की बेहतरीन फॉर्वर्ड खिलाड़ी
जूनियर नेशनल खेल चुकीं पूर्णिमा पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने में एक्सपर्ट है। उनका ड्रैग फ्लिक विरोधी टीम के गोलकीपर को मुश्किल में डाल देता हैं। खेल के अंतिम समय में गोल करने और विरोधी टीम को चकमा देने में उन्हें महारथ है।
एक साल में हासिल किया था छात्रावास
अपने प्रदर्शन के दम पर पूर्णिमा ने एक साल में ही गोरखपुर स्पोर्ट्स छात्रावास में चयनित हो गई थीं। खेल में उनकी रुचि को देखते हुए ही मां अमरावती ने कर्ज लेकर हॉकी किट दिलाई। 2016 से पूर्णिमा हॉकी खेल रही हैं। एशियाई हॉकी महासंघ (एएचएफ) जूनियर एशिया कप आयोजित कराया जाता है।