{"_id":"5ac651f74f1c1bf5618b5a59","slug":"private-schhol-will-be-closed-on-seven-april-in-all-over-india","type":"story","status":"publish","title_hn":" RTE के खिलाफ सात अप्रैल को देश भर के प्राइवेट स्कूल रहेंगे बंद ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
RTE के खिलाफ सात अप्रैल को देश भर के प्राइवेट स्कूल रहेंगे बंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 06 Apr 2018 10:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (नीसा) के आह्वान पर सात अप्रैल को देश भर के निजी विद्यालय बंद रहेंगे। शिक्षा बचाओ अभियान के तहत देश भर के निजी विद्यालयों के संचालक, प्रिंसिपल, अध्यापक दिल्ली के रामलीला मैदान में एकजुट हो रहे हैं।
नीसा की यह पहल देश भर के निजी विद्यालयों के प्रति सरकार की दमनकारी और नियंत्रणकारी नीतियों के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाने के लिए की गई है। इस अभियान में भागीदारी करने के लिए स्कूल अपनी रणनीति भी तैयार कर रहे हैं।
जो विद्यालय दिल्ली में अपना प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएंगे, वो अपने स्कूलों में ही बैनर टांगकर और स्कूल बंद कर इस अभियान को अपना समर्थन देंगे।
उधर कॉन्वेंट स्कूलों द्वारा सात को बंदी करने के फैसले पर अभिभावकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गैर जिम्मेदाराना ठहराया है।
उनका कहना है कि विद्यालय भले ये दावा कर रहे हों कि उनका ये अभियान शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने और शिक्षकों के मान सम्मान के लिए है लेकिन सच्चाई ये है कि वो आरटीई के खिलाफ हैं।
विज्ञापन
साझा संस्कृति मंच के वल्लभ पांडेय का कहना है कि निजी स्कूल भले स्वयं को चैरिटेबल संस्था कहते हों लेकिन असल में वो व्यवसाय कर रहे हैं।
आरटीई के दाखिले न लेना पड़े इसके लिए शिक्षा विभाग की मिलीभगत से वो सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं जो कि गैर संवैधानिक है। रही बात बच्चों को एजूकेशन वाउचर देने कि तो वो संवैधानिक व्यवस्था के मूल भावना के खिलाफ है।
विज्ञापन
नीसा की यह पहल देश भर के निजी विद्यालयों के प्रति सरकार की दमनकारी और नियंत्रणकारी नीतियों के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाने के लिए की गई है। इस अभियान में भागीदारी करने के लिए स्कूल अपनी रणनीति भी तैयार कर रहे हैं।
विज्ञापन
जो विद्यालय दिल्ली में अपना प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएंगे, वो अपने स्कूलों में ही बैनर टांगकर और स्कूल बंद कर इस अभियान को अपना समर्थन देंगे।
उधर कॉन्वेंट स्कूलों द्वारा सात को बंदी करने के फैसले पर अभिभावकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गैर जिम्मेदाराना ठहराया है।
उनका कहना है कि विद्यालय भले ये दावा कर रहे हों कि उनका ये अभियान शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने और शिक्षकों के मान सम्मान के लिए है लेकिन सच्चाई ये है कि वो आरटीई के खिलाफ हैं।
विज्ञापन
साझा संस्कृति मंच के वल्लभ पांडेय का कहना है कि निजी स्कूल भले स्वयं को चैरिटेबल संस्था कहते हों लेकिन असल में वो व्यवसाय कर रहे हैं।
आरटीई के दाखिले न लेना पड़े इसके लिए शिक्षा विभाग की मिलीभगत से वो सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं जो कि गैर संवैधानिक है। रही बात बच्चों को एजूकेशन वाउचर देने कि तो वो संवैधानिक व्यवस्था के मूल भावना के खिलाफ है।