{"_id":"59c142ae4f1c1b2f688b545b","slug":"private-nursing-home-refer-dead-child-to-another-hospital","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"प्राइवेट नर्सिंग होम का करानामा, मृत बच्चे को जिंदा दिखाकर कर दिया रेफर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्राइवेट नर्सिंग होम का करानामा, मृत बच्चे को जिंदा दिखाकर कर दिया रेफर
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 20 Sep 2017 02:20 PM IST
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- फोटो : डेमो
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यूपी के आजमगढ़ में स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम संचालक ने मंगलवार को मृत नवजात को जिंदा दिखाकर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। परिवार के लोगों ने जब उसे शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया तो सच से पर्दा उठा। घटना जिले के जीयनपुर कस्बा में स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम का है।
डॉक्टर की लापरवाही से नाराज लोग नवजात की लाश संग अस्पताल के बाहर हंगामा करने लगे। बाद में लाश लेकर थाने चले गए। जहां पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के ओझौली गांव निवासी नीतू पत्नी विजय बहादुर का मायका जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के खालिसपुर लाक्षिया गांव में है।
नीतू का पति मुंबई में रहकर किसी प्राइवेट कंपनी में काम करता है। नीतू को बच्चा पैदा होने वाला था तो वह अपने मायके चली आई। 17 सितंबर को प्रसव पीड़ा होने पर गांव की आशा से नीतू के मायके वालों ने संपर्क किया।
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आशा कार्यकत्री प्रसूता नीतू को सरकारी अस्पताल में न ले जाकर उसे जीयनपुर बाजार में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर चली गई। आशा कार्यकत्री के कहने पर घर वालों ने नीतू को यहां भर्ती करा दिया।
जहां उसने देर शाम को लड़के को जन्म दिया। प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ थे। इसी बीच मंगलवार की सुबह अचानक डाक्टर ने नीतू के परिवारवालों को बुलाया और कहा कि बच्चे की तबीयत खराब है। इसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाना होगा।
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डॉक्टर की लापरवाही से नाराज लोग नवजात की लाश संग अस्पताल के बाहर हंगामा करने लगे। बाद में लाश लेकर थाने चले गए। जहां पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के ओझौली गांव निवासी नीतू पत्नी विजय बहादुर का मायका जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के खालिसपुर लाक्षिया गांव में है।
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नीतू का पति मुंबई में रहकर किसी प्राइवेट कंपनी में काम करता है। नीतू को बच्चा पैदा होने वाला था तो वह अपने मायके चली आई। 17 सितंबर को प्रसव पीड़ा होने पर गांव की आशा से नीतू के मायके वालों ने संपर्क किया।
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आशा कार्यकत्री प्रसूता नीतू को सरकारी अस्पताल में न ले जाकर उसे जीयनपुर बाजार में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर चली गई। आशा कार्यकत्री के कहने पर घर वालों ने नीतू को यहां भर्ती करा दिया।
जहां उसने देर शाम को लड़के को जन्म दिया। प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ थे। इसी बीच मंगलवार की सुबह अचानक डाक्टर ने नीतू के परिवारवालों को बुलाया और कहा कि बच्चे की तबीयत खराब है। इसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाना होगा।
तीन घंटे पहले हो चुकी थी मौत
doctor
इतना कहते हुए डॉक्टर ने उसे रेफर कर दिया। परिवार के लोग नवजात को लेकर शहर के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल ले गए। जहां परीक्षण कर डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। डाक्टर ने कहा कि यह बच्चा तीन घंटे पहले ही मर चुका है।
जीयनपुर बाजार में स्थित अस्पताल के डाक्टर की यह हरकत जानने के बाद परिवार के लोग सन्न रह गए और शव लेकर जीयनपुर पहुंचे और नर्सिंग होम में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे।
अस्पताल के बाहर काफी देर तक शोर शराबा के बाद लाश लेकर थाने पहुंचे और दोषी डाक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करने लगे। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर उनमें सुलह समझौता करा दिया।
मामले में क्षेत्राधिकारी सुधाकर सिंह ने कहा कि दोनों पक्ष के लोग आपस में सुलह-समझौता कर लिए। थाने में कोई तहरीर नहीं दिया। ऐसे में पुलिस ने बगैर कोई कार्रवाई किए ही दोनों पक्षों को छोड़ दिया।
जीयनपुर बाजार में स्थित अस्पताल के डाक्टर की यह हरकत जानने के बाद परिवार के लोग सन्न रह गए और शव लेकर जीयनपुर पहुंचे और नर्सिंग होम में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे।
अस्पताल के बाहर काफी देर तक शोर शराबा के बाद लाश लेकर थाने पहुंचे और दोषी डाक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करने लगे। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर उनमें सुलह समझौता करा दिया।
मामले में क्षेत्राधिकारी सुधाकर सिंह ने कहा कि दोनों पक्ष के लोग आपस में सुलह-समझौता कर लिए। थाने में कोई तहरीर नहीं दिया। ऐसे में पुलिस ने बगैर कोई कार्रवाई किए ही दोनों पक्षों को छोड़ दिया।