प्रधानमंत्री का संसदीय कार्यालय बेचने का आइडिया चाय की दुकान पर आया, मुख्य आरोपी है शिक्षक, लिख चुका है पुस्तकें
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ऑनलाइन सामान की खरीद-बिक्री की वेबसाइट ओएलएक्स पर वाराणसी के जवाहर नगर एक्सटेंशन स्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय की बिक्री का विज्ञापन पोस्ट करने का मामला बड़ा रोचक हो गया है। दरअसल इसका मुख्य आरोपी एक शिक्षक है, जिसने एक चाय दुकानदार व अन्य के बहकावे में आकर विज्ञापन दे दिया। उसे परिचित चाय दुकानदार ने यह आइडिया दिया था। अब चारों पहुंच गए हैं सलाखों में।
साढ़े सात लाख रुपये कमीशन का था लालच
वाराणसी के इस रोचक मामले में शुक्रवार सुबह पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान दशमी निवासी शिक्षक डॉ. लक्ष्मीकांत ओझा, सरायनंदन खोजवा की कृष्णदेव नगर कॉलोनी के मनोज यादव व बाबूलाल पटेल और गुरुधाम कॉलोनी नवाबगंज के जितेंद्र कुमार वर्मा के तौर पर हुई है। डॉ. लक्ष्मीकांत ओझा के अनुसार उसने मनोज, बाबूलाल और जितेंद्र के बहकावे में आकर साढ़े सात लाख रुपये के कमीशन के लालच में ओएलएक्स पर विज्ञापन पोस्ट किया था।
साढ़े सात करोड़ रुपये बताई कीमत
ओएलएक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र स्थित इस कार्यालय की फोटो के साथ साढ़े सात करोड़ रुपये में इसकी बिक्री का विज्ञापन पोस्ट किया गया था। विक्रेता की जगह लक्ष्मीकांत ओझा नाम लिखा था। विज्ञापन में यह भी लिखा था कि हाउसेज एंड विला, चार बेडरूम बाथरूम के साथ, बिल्ड अप एरिया 6500 वर्ग फुट, दो मंजिला भवन दो कार पार्किंग के साथ ही नार्थ ईस्ट फेसिंग है।
इसके साथ ही प्रोजेक्ट का नाम पीएमओ कार्यालय वाराणसी लिखा गया है। गुरुवार को यह विज्ञापन सोशल मीडिया में वायरल होने लगा तो शाम के समय पुलिस ने उसे ओएलएक्स से हटवा दिया।
इस संबंध में शुक्रवार को एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि ओएलएक्स द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर भेलूपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके साथ ही विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर की मदद से इंस्पेक्टर भेलूपुर अमित कुमार मिश्रा और दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज प्रकाश सिंह ने अपनी टीम के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या बताएं कुछ समझ में ही नहीं आया, गलती तो बड़ी हो गई
एसएसपी के अनुसार, डॉ. लक्ष्मीकांत ओझा चंदौली में अलीनगर स्थित एक दिव्यांग विद्यालय में शिक्षक है और पुस्तकें भी लिख चुका है, उसकी कुछ पुस्तकें अभी प्रकाशित भी होने वाली हैं। लक्ष्मीकांत ने बताया कि वह अपने परिचित दूध-दही दुकानदार मनोज, बिजली मिस्त्री बाबूलाल और चाय दुकानदार जितेंद्र के बहकावे में आ गया था। तीनों ने उससे कहा था कि इस नामीगिरामी भवन की कीमत साढ़े सात करोड़ में तय हो गई तो उसे घर बैठे कमीशन का एक प्रतिशत साढ़े सात लाख रुपये आसानी से मिल जाएगा।
तीनों उसे यह भी कहते थे कि प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय के भवन की बिक्री की चर्चा शहर में जोरशोर से है और हम ही लोग क्यों न अगुुुआ बनकर इसे बेच दें। लक्ष्मीकांत ने बताया कि वह स्मार्ट फोन को बहुत अच्छे तरीके से इस्तेमाल करना भी नहीं जानता है। उसकी मति कैसे भ्रष्ट हो गई थी और यह सब कैसे हो गया, वह समझ ही नहीं पा रहा है।