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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Priests of Kashi Vishwanath Dham will do Saptarishi Aarti at Yogeshwar Mahadev Temple Bangalore

Varanasi: बेंगलुरु के योगेश्वर महादेव मंदिर में काशी विश्वनाथ धाम के पुजारी करेंगे सप्तऋषि आरती

Thu, 16 Mar 2023 11:35 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 16 Mar 2023 11:35 PM IST
सार

सद्गुरु जग्गी वासुदेव के सानिध्य में सप्तऋषि आरती के पुजारी बंगलुरु में प्रतिष्ठित योगेश्वर महादेव के शिवलिंग के सामने शीतकालीन संक्रांति पर 18 मार्च को सप्तऋषि आरती कराएंगे।

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Priests of Kashi Vishwanath Dham will do Saptarishi Aarti at Yogeshwar Mahadev Temple Bangalore
सद्गुरु जग्गी वासुदेव के सानिध्य में होगा आयोजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाबा विश्वनाथ की सप्तऋषि आरती का दायरा अब उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ रहा है। बेंगलुरु में स्थापित आदियोगी योगेश्वर महादेव मंदिर में पहली बार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारी सप्तऋषि आरती के जरिये सप्तऋषियों का आह्वान करेंगे। देश ही नहीं सात समंदर पार के श्रद्धालु भी इस आयोजन के साक्षी बनेंगे।

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सद्गुरु जग्गी वासुदेव के सानिध्य में सप्तऋषि आरती के पुजारी बंगलुरु में प्रतिष्ठित योगेश्वर महादेव के शिवलिंग के सामने शीतकालीन संक्रांति पर 18 मार्च को सप्तऋषि आरती कराएंगे। हर साल शीतकालीन संक्रांति पर ईशा योग केंद्र कोयंबटूर में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारी सप्तऋषि आरती करते हैं।

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ये पुजारी जाएंगे  बेंगलुरु

यही मौका होता है जब श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर की सप्तऋषि आरती के मंत्र वहां गुंजायमान होते हैं। सद्गुरु जग्गी वासुदेव का कहना है कि यह एक तकनीक है। 45 मिनट से एक घंटे में वे मंदिर में जो ऊर्जा पैदा करते हैं वह अभूतपूर्व होता है।

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काशी से जाने वाले पुजारियों की टीम में पंडित दयानंद दुबे, पंडित रामानंद दुबे, पंडित सुशील ककोरिया, पंडित अनिल चौबे, पंडित रोहन मिश्रा, पंडित शिवशंकर मिश्रा शामिल हैं। मंदिर के पुजारी कई वर्षों से कोयंबटूर में 112 फीट के आदियोगी के सामने सप्तऋषि आरती करते आ रहे हैं। इस परंपरा को जारी रखते हुए ये पुजारी सद्गुरु के सानिध्य में बंगलुरु में प्राण प्रतिष्ठित योगेश्वर लिंग पर सप्तऋषि आवाहनम करेंगे।

सप्तऋषि आवाहनम की उत्पत्ति

शिव ने परमात्मा तक पहुंचने के 112 तरीके अपने सात शिष्यों को बताए। सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार जब सप्तऋषियों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जाकर योग विज्ञान को प्रदान करना था, तो उन्होंने भगवान शिव से पूछा, ''हम आपकी उपस्थिति को अपने साथ कैसे ले जा सकते हैं?'' तब उन्होंने उन्हें एक सरल प्रक्रिया सिखाई, जो आज सप्तऋषि आवाहनम के रूप में विद्यमान है।
 
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