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Varanasi: राष्ट्रपति ने आयुषी को दिया पहला अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक, छात्रा बोली- आज गौरव का हो रहा अहसास
Mon, 11 Dec 2023 09:52 PM IST
आकाश दुबे
माई सिटी रिपोर्टर, वाराणसी
माई सिटी रिपोर्टर, वाराणसी
Published by: आकाश दुबे
Updated Mon, 11 Dec 2023 09:52 PM IST
सार
दीक्षांत समारोह के दौरान जब मंच से आयुषी का नाम पुकारा गया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वहीं राजाराम शास्त्री सभागार में आयोजन की लाइव स्ट्रीमिंग देख रहे उनके पिता अजय तिवारी भी भावुक हो उठे। बेटी ने राष्ट्रपति के हाथों स्वर्ण पदक प्राप्त करके उनका मान जो बढ़ाया था।
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परिवार के साथ आयुषी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 45वें दीक्षांत समारोह में पहली बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहला श्री अतुल माहेश्वरी स्मृति स्वर्ण पदक आयुषी तिवारी को दिया। राष्ट्रपति के हाथों पदक मिलने के बाद एमए पत्रकारिता एवं जनसंचार की छात्रा आयुषी तिवारी ने कहा कि वह खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।
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सोमवार को गांधी अध्ययन पीठ सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान जब मंच से आयुषी का नाम पुकारा गया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वहीं राजाराम शास्त्री सभागार में आयोजन की लाइव स्ट्रीमिंग देख रहे उनके पिता अजय तिवारी भी भावुक हो उठे। बेटी ने राष्ट्रपति के हाथों स्वर्ण पदक प्राप्त करके उनका मान जो बढ़ाया था। आयुषी को एमए पत्रकारिता एवं जनसंचार में 1181 अंक मिले हैं और उन्होंने अपने संस्थान में टॉप किया। स्वर्ण पदक मिलने के बाद आयुषी ने खुशी जताते हुए कहा कि उसके माता-पिता का विश्वास और सपना आज सच हो गया। देवरिया जिले के भटनी की रहने वाली आयुषी वर्तमान में इलेक्ट्राॅनिक मीडिया में बतौर ट्रेनी जॉब कर रही हैं। आयुषी ने बताया कि वह मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। उनके पिता अजय तिवारी छोटे व्यवसायी हैं और मां किरण तिवारी गृहिणी हैं।
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तीन भाई बहनों में आयुषी सबसे बड़ी हैं। छोटी बहन कीर्ति तिवारी काशी विद्यापीठ से ही एमकॉम कर रही हैं और छोटा भाई मार्कंडेय अभी ग्यारहवीं का छात्र है। आयुषी ने बताया कि वह अपने परिवार की पहली लड़की हैं जो अध्ययन के लिए अपने गृहनगर से बाहर निकली थीं। इंटर की परीक्षा पास की थी तो आगे की पढ़ाई के लिए बाहर जाने की बात हुई तो रिश्तेदारों और परिचितों ने पिताजी को सलाह दी कि यहीं पर प्राइवेट फार्म भरवा दीजिए। लेकिन, शुरू से ही मेरे नंबर अच्छे आते थे और और मैं पढ़ने में अच्छी थी। माता और पिताजी ने कहा कि बाहर जाएगी तो पढ़ लेगी। मैंने कोटा में मेडिकल की पढ़ाई की लेकिन मन नहीं लगा। इसके बाद स्नातक कक्षा में काशी विद्यापीठ में दाखिला लिया और उसके बाद पत्रकारिता से परास्नातक किया। मेहनत का ही परिणाम है जो आज मुझे यह उपलब्धि हासिल हुई है।
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