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लमही में जी उठे ‘घीसू’ और ‘माधव’
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 01 Aug 2016 01:23 AM IST
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प्रेमचंद की जयंती
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साहित्य, कला, रंगमंच प्रेमियों के लिए तीर्थ बने लमही गांव में रविवार को कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर चहुंदिशि उत्सव जैसा माहौल रहा। कहीं नाट्य मंचन हुआ तो कहीं प्रदर्शनी लगी। लोक संगीत की धुनें भी गूंजीं और बनारस घराने का शास्त्रीय संगीत भी। बिरहा, कजरी के सावनी माहौल के बीच ‘लमही महोत्सव’ का उद्घाटन मुंशी प्रेमचंद की चर्चित कहानी ‘मैकू’ के जीवंत पात्र रहे मैकूलाल की पत्नी कलावती देवी ने दीप जलाकर किया।
लोक निर्माण एवं सिंचाई राज्य मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने रचनाओं के माध्यम से समाज के आखिरी व्यक्ति की पीड़ा को आवाज दी। उनके जैसा संवेदनशील बनना तो कठिन है लेकिन उनके बताए रास्ते पर कुछ कदम भी लोग चल सकें तो बड़ी बात होगी। मानवीय संवेदनाओं को समझने और उकेरने वाला उनके जैसा दूसरा होना मुश्किल है। मंत्री को बुके एवं अंगवस्त्रम से सम्मानित किया क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रमुख डॉ. रत्नेश वर्मा ने।
मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने कहा कि प्रेमचंद ने जिस युग में लोकजन की सूक्ष्म संवेदनाओं का जीवंत चित्रण अपनी रचनाओं में किया, उन संवेदनाओं को जगाए रखने की जरूरत है। इस मौके पर एसडीएम सदर आर्यका अखौरी, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव समेत तमाम लोग उपस्थित थे। लमही महोत्सव को संगीतमय बनाने की पूरी कोशिश की गई थी।
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दीपक सिंह एवं साथी कलाकारों ने बिरहा, कजरी पर लोगों को झुमाया तो बनारस घराने के विख्यात ठुमरी गायक पं. महादेव प्रसाद मिश्र के पुत्र पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने पावस ऋतु एवं पारंपरिक गीतों की जोरदार प्रस्तुति की। डॉ. जितेंद सिंह जीत ने लोक गीत सुनाए।वहीं, नागरी प्रचारिणी सभा की ओर से शाम को प्रेमचंद जयंती समारोह मनाया गया। यहां प्रो. श्रद्धानंद, न्यायमूर्ति गणेश दत्त दूबे, ओम धीरज, भगवंती सिंह, डॉ. राम अवतार पांडेय आदि मौजूद रहे।
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लोक निर्माण एवं सिंचाई राज्य मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने रचनाओं के माध्यम से समाज के आखिरी व्यक्ति की पीड़ा को आवाज दी। उनके जैसा संवेदनशील बनना तो कठिन है लेकिन उनके बताए रास्ते पर कुछ कदम भी लोग चल सकें तो बड़ी बात होगी। मानवीय संवेदनाओं को समझने और उकेरने वाला उनके जैसा दूसरा होना मुश्किल है। मंत्री को बुके एवं अंगवस्त्रम से सम्मानित किया क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रमुख डॉ. रत्नेश वर्मा ने।
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मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने कहा कि प्रेमचंद ने जिस युग में लोकजन की सूक्ष्म संवेदनाओं का जीवंत चित्रण अपनी रचनाओं में किया, उन संवेदनाओं को जगाए रखने की जरूरत है। इस मौके पर एसडीएम सदर आर्यका अखौरी, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव समेत तमाम लोग उपस्थित थे। लमही महोत्सव को संगीतमय बनाने की पूरी कोशिश की गई थी।
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दीपक सिंह एवं साथी कलाकारों ने बिरहा, कजरी पर लोगों को झुमाया तो बनारस घराने के विख्यात ठुमरी गायक पं. महादेव प्रसाद मिश्र के पुत्र पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने पावस ऋतु एवं पारंपरिक गीतों की जोरदार प्रस्तुति की। डॉ. जितेंद सिंह जीत ने लोक गीत सुनाए।वहीं, नागरी प्रचारिणी सभा की ओर से शाम को प्रेमचंद जयंती समारोह मनाया गया। यहां प्रो. श्रद्धानंद, न्यायमूर्ति गणेश दत्त दूबे, ओम धीरज, भगवंती सिंह, डॉ. राम अवतार पांडेय आदि मौजूद रहे।