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योगी राज का असर, वाराणसी में पुलिस ने सील किया अवैध स्लाटर हाउस

Thu, 23 Mar 2017 04:19 PM IST
amarujala.com- Written by : शैलेश कुमार शुक्ल
amarujala.com- Written by : शैलेश कुमार शुक्ल Updated Thu, 23 Mar 2017 04:19 PM IST
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Police sealed illegal slaughterhouse in Varanasi
slaughter house in Varanasi - फोटो : अमर उजाला

वाराणसी में अलईपुरा में पुलिस ने आज अवैध स्लाटर हाउस को सील कर दिया। करीब तीन घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान स्लाटर हाउस के मालिक कागजात नहीं दिखा सके। वहीं कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में स्‍थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा हो गए।

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उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया। पुलिस और स्‍थानीय लोगों में बहस भी हुई।  बता दें कि सूबे की नई सरकार ने अवैध बूचड़खानों को तत्काल बंद करने का सख्त निर्देश दिया है लेकिन शहर में बूचड़खानों का ‘बड़ा खेल’ चल रहा है। अवैध बूचड़खानों की छोड़िए, यहां के वैध बूचड़खानों के संचालन पर भी शासन ने पहले से रोक लगा रखी है।
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वजह, इनका घनी आबादी के बीच होना, इनसे फैलता प्रदूषण, गंदगी और सीवेज समस्या। लेकिन, हालात कुछ और ही गवाही दे रहे हैं। शासन की रोक के बाद कागज पर तो स्लाटर हाउस बंद दिखा दिए गए लेकिन उनका संचालन नहीं रुका।
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कारण, नगर निगम और पुलिस और संचालकों की गठजोड़। मोटी कमाई के लिए शासन की आंखों में धूल झोंकने की यह कवायद सोमवार की शाम तक जारी थी। वहीं, नगर निगम, पुलिस और प्रशासन सब अपने दावे पर कायम थे कि कहीं कोई एक भी स्लाटर हाउस संचालित नहीं हो रहा है।


बेनियाबाग, कमलगड़हा (गोलगड्डा), कचहरी (अर्दली बाजार) में पशु वधशालाएं हैं। इसके अलावा, भेलूपुर और हुकुलगंज में अवैध बूचड़खाने संचालित होते हैं। जो कहीं रिकॉर्ड में ही नहीं हैं। सब कुछ नगर निगम और पुलिस की मिलीभगत से चलता है। वहीं, बेनियाबाग, कमलगड़ा और कचहरी के स्लाटर हाउस पर शासन स्तर से रोक लगी हुई है।
 

जिला मुख्यालय के समीप हो रहा काला कारोबार

Police sealed illegal slaughterhouse in Varanasi
slaughter house in Varanasi - फोटो : अमर उजाला

सूत्रों का दावा है कि बेनिया को छोड़ दिया जाए तो कोई भी स्लाटर हाउस बंद नहीं है। शहर के बूचड़खानों में रोजाना पांच सौ से अधिक पशु पहुंचाए जाते हैं। रोजाना मांस और चमड़े की सप्लाई होती है। लीदा-पचौनी, गंदगी से आसपास के बाशिंदे बेहाल हैं।

इन इलाकों में सीवेज सिस्टम जाम होने की बड़ी वजह भी बूचड़खानों का मलबा है लेकिन इतना सबके बाद भी नगर निगम, प्रशासन और पुलिस, सबका यही दावा है कि कहीं कोई बूचड़खाना नहीं चल रहा है। जबकि, पांडेयपुर से हुकुलगंज मार्ग पर हुकुलगंज बस्ती में वरुणा किनारे अवैध बूचड़खाना खुलेआम संचालित होता है।

गंदगी और बदबू के साथ फैला मलबा किसी को भी विचलित कर देगा लेकिन नगर निगम, पुलिस और प्रशासन को कहीं कुछ नजर नहीं आता। इलाके लोग बताते हैं कि बाढ़ के दिनों में लीदा-पचौनी, हड्डियां बहकर घरों मेेें पहुंच जाती हैं। शिकायत पर भी अधिकारी चुप्पी साधे रहते हैं।

 

और तो और, जिला मुख्यालय के समीप कचहरी (अर्दली बाजार) क्षेत्र में भी स्लाटर हाउस का संचालन नहीं रुका है। कमलगढ़हा (गोलगड्डा) में तो स्लाटर हाउस से निकलने वाले लीदा-पचौनी और मलबे से कई बार पूरे इलाके की सीवर लाइन जाम हो चुकी है।

यह सब अधिकारियों के संज्ञान में भी है लेकिन कभी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। जबकि, इस स्लाटर हाउस के संचालन पर छह साल से रोक लगी हुई है। शासन से रोक के बाद भी स्लाटर हाउसों के संचालित होने से आसपास के बाशिंदे बेहाल हैं लेकिन शिकायत करें तो किससे।

अधिकारी सुनने वाले नहीं, ऊपर से संचालकों का खौफ। निगम सूत्रों की मानें तो इन स्लाटर हाउसों से मोटा चढ़ावा नीचे से ऊपर तक जाता है। इसी का नतीजा है कि तमाम निर्देशों के बाद भी इनका संचालन बंद नहीं हो पाता।

 

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