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MSP पर बोले पीएम मोदी- छल से नहीं, गंगाजल जैसी पवित्र नीयत से काम हो रहा

Mon, 30 Nov 2020 04:46 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 30 Nov 2020 04:46 PM IST
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PM Modi in Varanasi dev deepawali: PM Modi addressed public meeting slammed opposition on agriculture law
खजुरी में पीएम मोदी ने जनसभा को किया संबोधित। - फोटो : अमर उजाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देव दीपावली देखने के लिए सोमवार को वाराणसी पहुंच गए। बनारस पहुंचकर उन्होंने मिर्जामुराद के खजुरी में जनसभा को संबोधित किया। यहां उन्होंने वाराणसी-प्रयागराद सिक्सलेन हाईवे का लोकार्पण किया। साथ ही उन्होंने कि इससे किसानों को भी फायदा मिलेगा। किसानों को लेकर उन्होंने विपक्षियों पर भी हमला बोला है। जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

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कनेक्टविटी का किसानों को होता है फायदा
पीएम मोदी ने कहा कि जब किसी क्षेत्र में आधुनिक कनेक्टिविटी का विस्तार होता है, तो इसका बहुत लाभ हमारे किसानों को भी होता है। बीते वर्षों में ये प्रयास हुआ है कि गांवों में आधुनिक सड़कों के साथ भंडारण, कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्थाएं खड़ी की जाएं। इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये का फंड भी बनाया गया है।
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पीएम मोदी ने जनसभा में कहा कि मुझे ऐहसास है कि दशकों का छलावा किसानों को आशंकित करता है। लेकिन अब छल से नहीं गंगाजल जैसी पवित्र नीयत के साथ काम किया जा रहा है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि सिर्फ दाल की ही बात करें तो 2014 से पहले के 5 सालों में लगभग साढ़े 600 करोड़ रुपये की ही दाल किसान से खरीदी गईं। लेकिन इसके बाद के 5 सालों में हमने लगभग 49,000 करोड़ रुपये की दालें खरीदी हैं यानी लगभग 75 गुना बढ़ोतरी। हमने वादा किया था कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुकूल लागत का डेढ़ गुना MSP देंगे। ये वादा सिर्फ कागजों पर ही पूरा नहीं किया गया, बल्कि किसानों के बैंक खाते तक पहुंचाया है।

अब आप ही बताइए कि अगर मंडियों और MSP को ही हटाना था, तो इनको ताकत देने के लिए, इन पर इतना निवेश ही क्यों करते? 2014 से पहले के 5 सालों में पहले की सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपये का धान खरीदा था। लेकिन इसके बाद के 5 सालों में 5 लाख करोड़ रुपये धान के MSP के रूप में किसानों तक हमने पहुंचाई हैं। यानी लगभग ढाई गुना ज्यादा पैसा किसान के पास पहुंचा है। हमारी सरकार तो मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है।

पीएम ने कहा कि आपको याद रखना है, यही लोग हैं जो पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर ये लोग सवाल उठाते थे। ये अफवाह फैलाते थे कि ये मोदी है इसलिए ये चुनाव को देखते हुए 2 हजार रूपये दिया जा रहा है और चुनाव के बाद इस पैसे को ब्याज सहित वापस देना पड़ेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर किसान को ऐसा कोई खरीददार मिल जाए, जो सीधा खेत से फसल उठाए और बेहतर दाम दे, तो क्या किसान को उसकी उपज बेचने की आजादी मिलनी चाहिए या नहीं। भारत के कृषि उत्पाद पूरी दुनिया में मशहूर हैं। क्या किसान की इस बड़े मार्केट और ज्यादा दाम तक पहुंच नहीं होनी चाहिए? अगर कोई पुराने सिस्टम से ही लेन-देन ही ठीक समझता है तो, उस पर भी कहां रोक लगाई गई है?

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