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कोरोना का असर: खेलो इंडिया खेल चुकी खिलाड़ी बेच रही सब्जी, छोटी बहन कर रही ये काम
Tue, 23 Jun 2020 11:19 AM IST
गीतार्जुन गौतम
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Tue, 23 Jun 2020 11:19 AM IST
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सब्जी बेच रही श्वेता।
- फोटो : अमर उजाला।
कोरोना काल में खेल गतिविधिया ठप होने से खिलाड़ी भी धीरे-धीरे दूसरे काम में जुटने लगे हैं। इसी क्रम में वाराणसी के पहाड़ी गांव के रुद्रनगर इलाके की दो नेशनल फुटबालर बहनें भी हैं जो सब्जी बेचने और कागज के लिफाफे बनाने में जुट गई हैं।
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10वीं की छात्रा श्वेता केशरी ने बताया कि कोरोना की वजह खेल मैदानों में न तो खेलने की अनुमति है और न ही अभ्यास की छूट है। ऊपर से खेल प्रतियोगिताएं भी अनिश्चित काल के लिए स्थगित है। ऐसे में लॉकडाउन के दौरान जर्जर हो चुकी घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए मां बाप के व्यवसाय में ही हाथ बंटाने में जुट गई हूं।
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लॉकडाउन के दौरान मां इंदु देवी के माला बनाने का काम ठप हुआ तो दूसरी ओर पिता मुन्ना केसरी द्वारा संचालित किराने की दुकान भी बंद हो गई। ऐसे में घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी। ऐसे में श्वेता ने घर के छह सदस्यीय परिवार का खर्च चलाने के लिए सब्जी बेचना शुरू कर दिया। इसके अलावा अपनी छोटी बहन सुहानी केसरी के साथ मिलकर कागज का लिफाफा भी बनाना शुरू कर दिया।
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श्वेता ने छह साल के फुटबाल करियर में दो बार नेशनल खेला है। एक बार खेलो इंडिया के अंडर 17 टीम की हिस्सा रह चुकी हैं। इसके अलावा 2016 में स्टेट चैंपियन टीम की भी हिस्सा रहीं। वहीं छोटी बहन सुहानी ने उड़ीसा में नेशनल प्रतियोगिता में यूपी टीम का हिस्सा रही। जबकि भाई सुमित केशरी भी एक फुटबालर है, उसने भी घर के हालातों को देखते हुए खेलना छोड़ दिया है।